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Kotdwar News: आयुर्वेदिक अस्पताल खुलने के बाद भी लगानी पड़ेगी बेस अस्पताल की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 01 Feb 2026 05:37 PM IST
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50 बेड के निर्माणाधीन आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खोलने की मांग ने पकड़ा जोर
कण्वघाटी/कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत लछमपुर में प्रस्तावित 50 बेड के अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खोलने की मांग जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र के अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा की सुविधा न होने के कारण उन्हें रात को स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को 15 से 20 किमी. दूर बेस अस्पताल कोटद्वार ले जाना पड़ता है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रस्तावित आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खोलने की मांग उठाई है। भाबर क्षेत्र में तीन सरकारी अस्पताल हैं जिसमें झंडीचौड़ और मोटाढाक में पीएचसी टाइप-1 अस्पताल है, जबकि कलालघाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टाइप 2 अस्पताल हैं। भाबर क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थित तीनों अस्पताल छोटे हैं और इनमें इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। रात को स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को बेस अस्पताल लाना भाबर के लोगों की मजबूरी होती है।
लछमपुर में 17 करोड़ की लागत से 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बन रहा है। पांच मंजिला भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है, लेकिन इस अस्पताल में भी एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा की सुविधा प्रस्तावित नहीं है जिससे उन्हें इमरजेंसी सेवाओं के लिए बेस अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ेगा। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है।
भाबर में स्थित तीनों छोटे अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा की सुविधा नहीं है। रात में स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को बेस अस्पताल ले जाना लोगों की मजबूरी है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- विकास कुकरेती, निवासी जशोधरपुर। (फोटो)
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झंडीचौड़ तीन ओर से वन सीमाओं से सटा है। रात को यहां वन्यजीवों की मूवमेंट बनी रहती है। स्थानीय अस्पताल में इमरजेंसी सेवा की सुविधा न होने के कारण रात को तबीयत खराब होने पर 15 किमी. दूर मरीज को बेस अस्पताल ले जाना पड़ता है। निर्माणाधीन आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खुलने से राहत मिलेगी।
- गीता सिंह, समाजसेवी झंडीचौड़ उत्तरी। (फोटो)
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बेस अस्पताल में पहले ही मरीजों का भारी दबाव रहता है, जिससे मरीजों का उपचार कराने के लिए तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा उपलब्ध होने पर जहां क्षेत्रवासियों को रात को भी इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
- इंद्रजीत सिंह रावत, अध्यक्ष संकल्प फाउंडेशन। (फोटो)
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मवाकोट, गोरखपुर, सत्तीचौड़ समेत आसपास के क्षेत्र में कोई अस्पताल नहीं है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खुलने से उन्हें भी रात को नजदीक में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
- विजय नैथानी, निवासी मवाकोट। (फोटो)
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कण्वघाटी/कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत लछमपुर में प्रस्तावित 50 बेड के अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खोलने की मांग जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र के अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा की सुविधा न होने के कारण उन्हें रात को स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को 15 से 20 किमी. दूर बेस अस्पताल कोटद्वार ले जाना पड़ता है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रस्तावित आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खोलने की मांग उठाई है। भाबर क्षेत्र में तीन सरकारी अस्पताल हैं जिसमें झंडीचौड़ और मोटाढाक में पीएचसी टाइप-1 अस्पताल है, जबकि कलालघाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टाइप 2 अस्पताल हैं। भाबर क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थित तीनों अस्पताल छोटे हैं और इनमें इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। रात को स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को बेस अस्पताल लाना भाबर के लोगों की मजबूरी होती है।
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लछमपुर में 17 करोड़ की लागत से 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बन रहा है। पांच मंजिला भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है, लेकिन इस अस्पताल में भी एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा की सुविधा प्रस्तावित नहीं है जिससे उन्हें इमरजेंसी सेवाओं के लिए बेस अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ेगा। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है।
भाबर में स्थित तीनों छोटे अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा की सुविधा नहीं है। रात में स्वास्थ्य खराब होने पर मरीज को बेस अस्पताल ले जाना लोगों की मजबूरी है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- विकास कुकरेती, निवासी जशोधरपुर। (फोटो)
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झंडीचौड़ तीन ओर से वन सीमाओं से सटा है। रात को यहां वन्यजीवों की मूवमेंट बनी रहती है। स्थानीय अस्पताल में इमरजेंसी सेवा की सुविधा न होने के कारण रात को तबीयत खराब होने पर 15 किमी. दूर मरीज को बेस अस्पताल ले जाना पड़ता है। निर्माणाधीन आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खुलने से राहत मिलेगी।
- गीता सिंह, समाजसेवी झंडीचौड़ उत्तरी। (फोटो)
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बेस अस्पताल में पहले ही मरीजों का भारी दबाव रहता है, जिससे मरीजों का उपचार कराने के लिए तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा उपलब्ध होने पर जहां क्षेत्रवासियों को रात को भी इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
- इंद्रजीत सिंह रावत, अध्यक्ष संकल्प फाउंडेशन। (फोटो)
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मवाकोट, गोरखपुर, सत्तीचौड़ समेत आसपास के क्षेत्र में कोई अस्पताल नहीं है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एलोपैथी यूनिट व इमरजेंसी सेवा खुलने से उन्हें भी रात को नजदीक में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
- विजय नैथानी, निवासी मवाकोट। (फोटो)
