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हाईकोर्ट का फैसला: असफल अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने का अधिकार, यूकेपीएससी का नोट-4 असंवैधानिक घोषित

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 12 Mar 2026 01:29 PM IST
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सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की चयन परीक्षा संबंधी उस नियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया जिसके तहत कहा गया था कि उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण केवल अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही संभव होगा।

High Court verdict Unsuccessful candidates have the right to show their answer sheets
नैनीताल हाईकोर्ट।
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विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की चयन परीक्षा संबंधी उस नियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया जिसके तहत कहा गया था कि उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण केवल अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही संभव होगा। इस नियम के चलते आयोग ने याचिकाकर्ताओं को प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अतिरिक्त निजी सचिव (एपीएस) भर्ती से संबंधित शॉर्टहैंड परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए असफल अभ्यर्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण का अधिकार दे दिया।

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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता संवैधानिक रूप से आवश्यक है।

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राजवीर सिंह, रणवीर सिंह तोमर, रुचि राणा समेत अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर 3 फरवरी 2026 को घोषित शॉर्टहैंड परीक्षा परिणाम तथा उससे जुड़े नोट-4 को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें अपनी शॉर्टहैंड नोटबुक और टाइप की गई उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे मूल्यांकन की शुद्धता की जांच करना संभव नहीं हो पा रहा था। सचिवालय देहरादून और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग हरिद्वार में अतिरिक्त निजी सचिव के कुल 99 पदों के लिए 18 जुलाई 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया के पहले चरण में हिंदी-अंग्रेजी टाइपिंग, कंप्यूटर ज्ञान और शॉर्टहैंड जैसे कौशल परीक्षण शामिल थे। इसमें सफल अभ्यर्थियों को ही दूसरे चरण की लिखित परीक्षा में शामिल होना था।


याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने पहले चरण के अन्य परीक्षण सफलतापूर्वक पास किए थे और शॉर्टहैंड परीक्षा में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन परिणाम में उनका चयन नहीं हुआ। इस पर उन्होंने मूल्यांकन में संभावित त्रुटि की आशंका जताते हुए उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण की मांग की। आयोग की ओर से जारी नोट-4 में कहा गया था कि उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण केवल अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही संभव होगा। हाईकोर्ट ने इस प्रावधान को असफल अभ्यर्थियों के संदर्भ में असंवैधानिक ठहराते हुए कहा कि यदि निरीक्षण में देरी की जाती है तो बाद में गलती सुधारना लगभग असंभव हो जाएगा और अभ्यर्थियों को अपूरणीय क्षति होगी। खंडपीठ ने कहा कि मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना की श्रेणी में आती है और अभ्यर्थी को उसे देखने व उसकी प्रति प्राप्त करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि नोट-4 को उस सीमा तक रद्द किया जाता है, जहां यह असफल अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण से रोकता है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपनी शॉर्टहैंड नोटबुक व उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण तथा प्रतिलिपि प्राप्त करने दी जाए।

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