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Nainital News: नवजात के दिमाग को नुकसान पहुंचाती है ऑक्सीजन की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 21 Mar 2026 02:42 AM IST
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल के बाल रोग विभाग ने एक अध्ययन में पाया है कि जन्म के बाद ऑक्सीजन की कमी नवजात शिशुओं के दिमाग को नुकसान पहुंचा सकती है। डेढ़ साल तक चले इस शोध में यह भी सामने आया कि जन्म के समय न रोने वाले और 1500 ग्राम से कम वजन के बच्चों में दौरे पड़ने का खतरा अधिक होता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया के निर्देशन में डॉ. प्रीति ने 135 नवजात शिशुओं पर यह अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि नवजातों में दौरे का सबसे बड़ा कारण ऑक्सीजन की कमी है। दूसरा प्रमुख कारण दिमागी संक्रमण है जो मां का पर्याप्त दूध न मिलने या स्वच्छता की कमी से हो सकता है। तीसरा कारण दिमाग में रक्तस्राव है, जो कभी-कभी प्लेटलेट्स कम होने से होता है। चौथा कारण कम वजन के बच्चों में शुगर और कैल्शियम की कमी है। अध्ययन में 57.7 फीसदी लड़के और 42.2 फीसदी लड़कियों में जन्म के बाद दौरे शुरू हुए थे।
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नवजात शिशुओं में दौरे के प्रकार
जन्म के पहले 28 दिन में आने वाले इन दौरों को नियोनेटल सीजर्स कहते हैं। मुख्य रूप से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण या जन्म के समय की चोट इनकी वजह होती है। सूक्ष्म दौरे सबसे आम हैं जिनमें आंखें झपकाना या मुंह से चबाने जैसी हरकतें शामिल हैं। क्लोनिक दौरे में शरीर के अंगों में धीमी गति से झटके लगते हैं जबकि टॉनिक दौरे में शरीर या हाथ-पैर सख्त हो जाते हैं। मायोक्लोनिक दौरे में मांसपेशियों में अचानक तेज झटका लगता है।
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जानलेवा हो सकते हैं दौरे
अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि जिन नवजातों में ऑक्सीजन की कमी थी और जिन्हें पांच से अधिक दौरे आ चुके थे उनमें से 22.9 फीसदी को बचाया नहीं जा सका। डॉ. ऋतु ने बताया कि एक हजार नवजातों में से दो से चार बच्चों में दौरे की शिकायत होती है और 1500 ग्राम से कम वजन वाले छह से 12 फीसदी बच्चों में यह समस्या अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
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विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया के निर्देशन में डॉ. प्रीति ने 135 नवजात शिशुओं पर यह अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि नवजातों में दौरे का सबसे बड़ा कारण ऑक्सीजन की कमी है। दूसरा प्रमुख कारण दिमागी संक्रमण है जो मां का पर्याप्त दूध न मिलने या स्वच्छता की कमी से हो सकता है। तीसरा कारण दिमाग में रक्तस्राव है, जो कभी-कभी प्लेटलेट्स कम होने से होता है। चौथा कारण कम वजन के बच्चों में शुगर और कैल्शियम की कमी है। अध्ययन में 57.7 फीसदी लड़के और 42.2 फीसदी लड़कियों में जन्म के बाद दौरे शुरू हुए थे।
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जन्म के पहले 28 दिन में आने वाले इन दौरों को नियोनेटल सीजर्स कहते हैं। मुख्य रूप से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण या जन्म के समय की चोट इनकी वजह होती है। सूक्ष्म दौरे सबसे आम हैं जिनमें आंखें झपकाना या मुंह से चबाने जैसी हरकतें शामिल हैं। क्लोनिक दौरे में शरीर के अंगों में धीमी गति से झटके लगते हैं जबकि टॉनिक दौरे में शरीर या हाथ-पैर सख्त हो जाते हैं। मायोक्लोनिक दौरे में मांसपेशियों में अचानक तेज झटका लगता है।
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अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि जिन नवजातों में ऑक्सीजन की कमी थी और जिन्हें पांच से अधिक दौरे आ चुके थे उनमें से 22.9 फीसदी को बचाया नहीं जा सका। डॉ. ऋतु ने बताया कि एक हजार नवजातों में से दो से चार बच्चों में दौरे की शिकायत होती है और 1500 ग्राम से कम वजन वाले छह से 12 फीसदी बच्चों में यह समस्या अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।