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वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए : राज्यपाल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:57 AM IST
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नैनीताल। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर में खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने विज्ञान आधारित पशुधन विकास और ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर बल दिया। राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने आईवीआरआई को विज्ञान, सेवा और राष्ट्रनिर्माण का केंद्र बताया। उन्होंने पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और पशुधन विकास में संस्थान के योगदान की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यह विशेष रूप से महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने वैज्ञानिकों से लैब टू लैंड अवधारणा को प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने आईवीआरआई से युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उद्यमिता से जोड़ने का आग्रह किया।
वन हेल्थ समय की जरूरत
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर राज्यपाल ने वन हेल्थ अवधारणा को समय की आवश्यकता बताया। राज्यपाल ने उत्तराखंड की स्वदेशी पशु नस्लों, जैसे बद्री गाय के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता भी बताई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टेली-पशु चिकित्सा सेवा और डिजिटल तकनीकों से दूरस्थ पशुपालकों तक विशेषज्ञ परामर्श पहुंच सकता है। राज्यपाल ने युवा वैज्ञानिकों से गांवों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझने को कहा। उन्होंने उन्हें व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने संस्थान से आगामी वर्षों में 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने का आह्वान किया।
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राज्यपाल गुरमीत सिंह ने आईवीआरआई को विज्ञान, सेवा और राष्ट्रनिर्माण का केंद्र बताया। उन्होंने पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और पशुधन विकास में संस्थान के योगदान की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यह विशेष रूप से महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने वैज्ञानिकों से लैब टू लैंड अवधारणा को प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने आईवीआरआई से युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उद्यमिता से जोड़ने का आग्रह किया।
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वन हेल्थ समय की जरूरत
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर राज्यपाल ने वन हेल्थ अवधारणा को समय की आवश्यकता बताया। राज्यपाल ने उत्तराखंड की स्वदेशी पशु नस्लों, जैसे बद्री गाय के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता भी बताई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टेली-पशु चिकित्सा सेवा और डिजिटल तकनीकों से दूरस्थ पशुपालकों तक विशेषज्ञ परामर्श पहुंच सकता है। राज्यपाल ने युवा वैज्ञानिकों से गांवों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझने को कहा। उन्होंने उन्हें व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने संस्थान से आगामी वर्षों में 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने का आह्वान किया।