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Pauri News: ब्रिटिशकालीन पुरानी जेल को संग्रहालय बनाने की कवायद तेज
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 03 Apr 2026 05:52 PM IST
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शुक्रवार को पुरानी जेल परिसर में नाम- जोख करती रूड़की की टीम।- संवाद।
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- रुड़की से आई विशेषज्ञों की टीम ने किया भवन का सर्वे, तैयार की जाएगी डपीआर
पौड़ी। जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन पुरानी जेल को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। शुक्रवार को इस संबंध में रुड़की से आई विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत सर्वेक्षण किया और भवन की वर्तमान स्थिति का आकलन किया।
प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई पौड़ी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने बताया कि यह पुरानी जेल ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है और इसे संरक्षित करते हुए संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके और लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल सके। सर्वे के दौरान टीम ने भवन की संरचना, मजबूती, उपलब्ध स्थान और अन्य तकनीकी पहलुओं का गहन निरीक्षण किया। साथ ही भवन का माप-जोख (मेजरमेंट) भी किया गया जिसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। बताया कि डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की लागत, संरचना में आवश्यक सुधार, संरक्षण कार्य और संग्रहालय के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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पौड़ी। जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन पुरानी जेल को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। शुक्रवार को इस संबंध में रुड़की से आई विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत सर्वेक्षण किया और भवन की वर्तमान स्थिति का आकलन किया।
प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई पौड़ी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने बताया कि यह पुरानी जेल ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है और इसे संरक्षित करते हुए संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके और लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल सके। सर्वे के दौरान टीम ने भवन की संरचना, मजबूती, उपलब्ध स्थान और अन्य तकनीकी पहलुओं का गहन निरीक्षण किया। साथ ही भवन का माप-जोख (मेजरमेंट) भी किया गया जिसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। बताया कि डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की लागत, संरचना में आवश्यक सुधार, संरक्षण कार्य और संग्रहालय के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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