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Pauri News: ‘सिरफिरों का घर’ नाटक ने दर्शकों को गुदगुदाया
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 10 Mar 2026 06:03 PM IST
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फोटो
गढ़वाल विवि के लोक कला संस्कृति निष्पादन केंद्र में नाट्य समारोह का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में संस्कृति मंत्रालय केंद्र सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और गढ़वाल विवि की ओर से पांच दिवसीय हिमाद्री नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में दूसरे दिन उदयपुर की मार्तण्ड फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत नाटक ‘सिरफिरों का घर’ का मंचन किया गया। नाटक में हास्य और सामाजिक संदेश का समन्वय देखने को मिला।
लगभग 70 मिनट की अवधि वाले इस नाटक की कहानी एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें आपसी नोकझोंक और हास्यपूर्ण स्थितियां दर्शकों को गुदगुदाती हैं। नाटक में हास्य के साथ-साथ मेवाड़ के वीर महाराणा प्रताप के चरित्र का भी प्रभावशाली चित्रण किया गया है। नाटक के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक प्रेम की महत्ता को भी रेखांकित करता है। नाटक का लेखन एवं निर्देशन विलास जानवे ने किया है। इसमें मनीष शर्मा, किरण जानवे, अमित मेनारिया, रेखा सिसोदिया और विलास जानवे ने अभिनय किया। संगीत समर्थ जानवे और भुवन शर्मा ने दिया जबकि मंच सज्जा धर्मेश शर्मा की रही। ध्वनि एवं प्रकाश का दायित्व रेखा सिसोदिया और अमित मेनारिया ने संभाला। मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. सुरेद्र सिंह बिष्ट, गणेश खुगशाल गणी, डा. संजय पांडे, प्रयागराज से हरीश असवाल आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में संस्कृति मंत्रालय केंद्र सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और गढ़वाल विवि की ओर से पांच दिवसीय हिमाद्री नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में दूसरे दिन उदयपुर की मार्तण्ड फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत नाटक ‘सिरफिरों का घर’ का मंचन किया गया। नाटक में हास्य और सामाजिक संदेश का समन्वय देखने को मिला।
लगभग 70 मिनट की अवधि वाले इस नाटक की कहानी एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें आपसी नोकझोंक और हास्यपूर्ण स्थितियां दर्शकों को गुदगुदाती हैं। नाटक में हास्य के साथ-साथ मेवाड़ के वीर महाराणा प्रताप के चरित्र का भी प्रभावशाली चित्रण किया गया है। नाटक के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक प्रेम की महत्ता को भी रेखांकित करता है। नाटक का लेखन एवं निर्देशन विलास जानवे ने किया है। इसमें मनीष शर्मा, किरण जानवे, अमित मेनारिया, रेखा सिसोदिया और विलास जानवे ने अभिनय किया। संगीत समर्थ जानवे और भुवन शर्मा ने दिया जबकि मंच सज्जा धर्मेश शर्मा की रही। ध्वनि एवं प्रकाश का दायित्व रेखा सिसोदिया और अमित मेनारिया ने संभाला। मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. सुरेद्र सिंह बिष्ट, गणेश खुगशाल गणी, डा. संजय पांडे, प्रयागराज से हरीश असवाल आदि मौजूद रहे।
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