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Pithoragarh News: मुनस्यारी की राजमा की ब्रांडिंग और विपणन को मिलेगा बढ़ावा
Sat, 08 Aug 2026 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:43 PM IST
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पिथौरागढ़। जीआई टैग प्राप्त मुनस्यारी राजमा की ब्रांडिंग, विपणन और मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। नाबार्ड ने पोस्ट-जीआई हस्तक्षेप के लिए 8.05 लाख रुपये की अनुदान सहायता राशि स्वीकृत की है। परियोजना का उद्देश्य मुनस्यारी राजमा को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ किसानों को जीआई टैग का वास्तविक आर्थिक लाभ दिलाना है। इससे क्षेत्र की पारंपरिक खेती पद्धतियों और स्थानीय पहचान के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
पिथौरागढ़ जिले के छह विशिष्ट उत्पादों मुनस्यारी राजमा, ऐंपण, च्यूरा तेल, रिंगाल शिल्प, ताम्र उत्पाद और थुलमा को जीआई पंजीकरण मिला है। जीआई टैग से इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण और विशिष्ट पहचान मिली है। अब इनके उत्पादकों तक इसका आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए पोस्ट-जीआई हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।
परियोजना के तहत 300 किसानों को जीआई के अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस आधारित ट्रेसबिलिटी प्रणाली विकसित की जाएगी। किसानों और उत्पादक संगठनों को जीआई के प्रति जागरूक करने के साथ प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग से जुड़ी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।
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क्यूआर कोड से पता चलेगी उत्पाद की प्रामाणिकता
मुनस्यारी राजमा के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी, मानकीकृत पैकेजिंग और विपणन सामग्री विकसित की जाएगी। हल्द्वानी में बायर-सेलर मीट आयोजित कर किसानों और उत्पादक संगठनों को घरेलू खरीदारों, निर्यात एजेंसियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और संगठित बाजारों से जोड़ा जाएगा। छिपलाकेदार एफपीओ को राजमा की खरीद, संग्रहण और विपणन के लिए नोडल संस्था के रूप में सशक्त किया जाएगा। इससे उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने और बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
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परियोजना दो वर्षों में भारतीय कृषि वानिकी विकास सहकारी लिमिटेड (आईएफएफडीसी) की ओर से क्रियान्वित की जाएगी। इसके तहत 11 गांवों में 10 जीआई जागरूकता कार्यक्रम, चार क्लस्टर स्तरीय प्रशिक्षण और एक जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। -राकेश सिंह कन्याल, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड
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पिथौरागढ़ जिले के छह विशिष्ट उत्पादों मुनस्यारी राजमा, ऐंपण, च्यूरा तेल, रिंगाल शिल्प, ताम्र उत्पाद और थुलमा को जीआई पंजीकरण मिला है। जीआई टैग से इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण और विशिष्ट पहचान मिली है। अब इनके उत्पादकों तक इसका आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए पोस्ट-जीआई हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।
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परियोजना के तहत 300 किसानों को जीआई के अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस आधारित ट्रेसबिलिटी प्रणाली विकसित की जाएगी। किसानों और उत्पादक संगठनों को जीआई के प्रति जागरूक करने के साथ प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग से जुड़ी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।
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क्यूआर कोड से पता चलेगी उत्पाद की प्रामाणिकता
मुनस्यारी राजमा के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी, मानकीकृत पैकेजिंग और विपणन सामग्री विकसित की जाएगी। हल्द्वानी में बायर-सेलर मीट आयोजित कर किसानों और उत्पादक संगठनों को घरेलू खरीदारों, निर्यात एजेंसियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और संगठित बाजारों से जोड़ा जाएगा। छिपलाकेदार एफपीओ को राजमा की खरीद, संग्रहण और विपणन के लिए नोडल संस्था के रूप में सशक्त किया जाएगा। इससे उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने और बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
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परियोजना दो वर्षों में भारतीय कृषि वानिकी विकास सहकारी लिमिटेड (आईएफएफडीसी) की ओर से क्रियान्वित की जाएगी। इसके तहत 11 गांवों में 10 जीआई जागरूकता कार्यक्रम, चार क्लस्टर स्तरीय प्रशिक्षण और एक जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। -राकेश सिंह कन्याल, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड