{"_id":"6a7765c83f066631310b0e79","slug":"large-quantities-of-keedajari-caterpillar-fungus-have-been-collected-but-buyers-are-nowhere-to-be-found-pithoragarh-news-c-230-1-pth1019-145360-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: कीड़ाजड़ी खूब बटोरी लेकिन नहीं मिल रहे खरीदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: कीड़ाजड़ी खूब बटोरी लेकिन नहीं मिल रहे खरीदार
Sat, 08 Aug 2026 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:52 PM IST
विज्ञापन
फोटो 08 पीटीएच 03 पी- कीड़ाजड़ी विहोहन करता काश्तकार। स्रोत: सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कीड़ाजड़ी का विदोहन कर ग्रामीण अपने गांवों को लौट आए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस बार कीड़ाजड़ी का अच्छा उत्पादन हुआ है।
इसकी खरीद-बिक्री की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को इसका उचित बाजार और कीमत नहीं मिल रही है। इसके चलते वे निराश हैं। लोगों के मुताबिक मुनस्यारी के गांवों में एक क्विंटल कीड़ाजड़ी डंप है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के दुर्गम बुग्यालों में सर्दियों के सीजन में काफी मात्रा में कीड़ाजड़ी का उत्पादन होता है। मध्य अप्रैल के बाद क्षेत्र के लोग कीड़ाजड़ी विदोहन के लिए बुग्यालों में जाते हैं। तीन वर्ष पूर्व तक ठेकेदार लगभग 16 लाख रुपये प्रति किलोग्राम ग्रेडिंग के हिसाब से ग्रामीणों से कीड़ाजड़ी खरीदते थे।
विज्ञापन
पिछले वर्ष भी काश्तकारों को इसका मूल्य महज छह लाख रुपये प्रति किलोग्राम ही मिल पाया। इस बार कीड़ाजड़ी का दाम महज तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक ही बताया जा रहा है।
उचित दाम नहीं मिलने से मल्ला जोहार, रालम, पातों, गोरीपार क्षेत्र, टांगा गोल्फा, बोना, तोमिक, नामिक, रिंगू, चुलकोट सहित कई गांवों के ग्रामीणों की लगभग एक क्विंटल कीड़ाजड़ी डंप रह गई है।
पातों निवासी ईश्वर सिंह नबियाल ने बताया कि कीड़ाजड़ी का सीमांत जिले में न तो बाजार है और न ही कोई स्पष्ट नीति है। इस कारण कीड़ाजड़ी डंप हो गई है।
विज्ञापन
इसकी खरीद-बिक्री की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को इसका उचित बाजार और कीमत नहीं मिल रही है। इसके चलते वे निराश हैं। लोगों के मुताबिक मुनस्यारी के गांवों में एक क्विंटल कीड़ाजड़ी डंप है।
विज्ञापन
उच्च हिमालयी क्षेत्र के दुर्गम बुग्यालों में सर्दियों के सीजन में काफी मात्रा में कीड़ाजड़ी का उत्पादन होता है। मध्य अप्रैल के बाद क्षेत्र के लोग कीड़ाजड़ी विदोहन के लिए बुग्यालों में जाते हैं। तीन वर्ष पूर्व तक ठेकेदार लगभग 16 लाख रुपये प्रति किलोग्राम ग्रेडिंग के हिसाब से ग्रामीणों से कीड़ाजड़ी खरीदते थे।
विज्ञापन
पिछले वर्ष भी काश्तकारों को इसका मूल्य महज छह लाख रुपये प्रति किलोग्राम ही मिल पाया। इस बार कीड़ाजड़ी का दाम महज तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक ही बताया जा रहा है।
उचित दाम नहीं मिलने से मल्ला जोहार, रालम, पातों, गोरीपार क्षेत्र, टांगा गोल्फा, बोना, तोमिक, नामिक, रिंगू, चुलकोट सहित कई गांवों के ग्रामीणों की लगभग एक क्विंटल कीड़ाजड़ी डंप रह गई है।
पातों निवासी ईश्वर सिंह नबियाल ने बताया कि कीड़ाजड़ी का सीमांत जिले में न तो बाजार है और न ही कोई स्पष्ट नीति है। इस कारण कीड़ाजड़ी डंप हो गई है।