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Pithoragarh News: उम्मीदों को झटका... महिला रोग विशेषज्ञ का 15 दिन में तबादला
Sat, 08 Aug 2026 10:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:49 PM IST
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फोटो-08 पीटीएच 02 पी-बेस अस्पताल, पिथौरागढ़। संवाद
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले की करीब तीन लाख महिला आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। 65 करोड़ रुपये की लागत से बने लिन्ठूड़ा बेस अस्पताल में संचालन के तीन साल बाद भी विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। करीब 15 दिन पूर्व ही मेडिकल कॉलेज के तहत प्रोफेसर के रूप में महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हुई थी लेकिन महज दो सप्ताह बाद ही उनका स्थानांतरण हल्द्वानी कर दिया गया।
इस त्वरित तबादले से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और बेटी बचाओ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि विशेषज्ञों की तैनाती के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इस निर्णय से एक बार फिर सीमांत जिले की महिलाओं को मामूली जांच और इलाज के लिए केवल महिला अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सीमांत क्षेत्रों में डॉक्टरों की इस तरह की मनमानी और त्वरित स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए ताकि पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को समय पर उचित चिकित्सा लाभ मिल सके।
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तमाम कोशिश के बाद भी सिर्फ 16 विशेषज्ञों की हो सकी है तैनाती
मेडिकल कॉलेज के इसी साल संचालन के दावे हो रहे हैं। इसके लिए जरूरी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी और बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लगातार प्रयास हो रहे हैं। बीते डेढ़ साल में स्थानीय और शासन स्तर पर हुए 12 से अधिक साक्षात्कार के बाद भी फैकल्टी के रूप में सिर्फ 16 विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। इसमें भी सर्जन, फिजिशियन, महिला, बाल रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सक नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 85 फैकल्टी की जरूरत है। इन हालात में कॉलेज प्रबंधन के लिए फैकल्टी के रूप में विशेषज्ञों की नियुक्ति करना चुनौती बन गया है।
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मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ का शासन स्तर पर स्थानांतरण हुआ है। कॉलेज प्रबंधन फैकल्टी और विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार प्रयास कर रहा है इसमें सफलता भी मिल रही है। उम्मीद है जल्द नई फैकल्टी मिलेगी। इनकी तैनाती से बेस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी। -डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़
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इस त्वरित तबादले से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और बेटी बचाओ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि विशेषज्ञों की तैनाती के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इस निर्णय से एक बार फिर सीमांत जिले की महिलाओं को मामूली जांच और इलाज के लिए केवल महिला अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
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लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सीमांत क्षेत्रों में डॉक्टरों की इस तरह की मनमानी और त्वरित स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए ताकि पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को समय पर उचित चिकित्सा लाभ मिल सके।
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तमाम कोशिश के बाद भी सिर्फ 16 विशेषज्ञों की हो सकी है तैनाती
मेडिकल कॉलेज के इसी साल संचालन के दावे हो रहे हैं। इसके लिए जरूरी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी और बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लगातार प्रयास हो रहे हैं। बीते डेढ़ साल में स्थानीय और शासन स्तर पर हुए 12 से अधिक साक्षात्कार के बाद भी फैकल्टी के रूप में सिर्फ 16 विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। इसमें भी सर्जन, फिजिशियन, महिला, बाल रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सक नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 85 फैकल्टी की जरूरत है। इन हालात में कॉलेज प्रबंधन के लिए फैकल्टी के रूप में विशेषज्ञों की नियुक्ति करना चुनौती बन गया है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ का शासन स्तर पर स्थानांतरण हुआ है। कॉलेज प्रबंधन फैकल्टी और विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार प्रयास कर रहा है इसमें सफलता भी मिल रही है। उम्मीद है जल्द नई फैकल्टी मिलेगी। इनकी तैनाती से बेस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी। -डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़