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समाज में लोकपर्व आज भी प्रासंगिक : जोशी

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Mon, 16 Feb 2026 11:22 PM IST
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Folk festivals are still relevant in society: Joshi
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पिथौरागढ़। आदलि-कुशलि कुमाऊंनी पत्रिका की ओर से हमारे समाज में लोक पर्वों की प्रासंगिकता पर मासिक विचार गोष्ठी एवं कविता पाठ का आयोजन किया गया। वरिष्ठ शिक्षक चिंतरमणि जोशी ने कहा कि कुमाऊंनी समाज संवत्सर प्रतिपदा चैत्र से होली टीका फाल्गुन तक वर्ष भर 40 से अधिक त्योहार उल्लास के साथ अभी भी मनाता है जो प्रमाणित करता है कि हमारे पर्व प्रासंगिक और समाजोपयोगी हैं। पत्रकार दिनेश पंत ने कहा कि अपनी संस्कृति को जीवंत रखने और जीवन में उल्लास, उमंग के लिए लोकपर्व महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। शिक्षक दिनेश भट्ट ने बाजारीकरण के प्रभाव में लोक पर्वों के विकृत होते स्वरूप पर चिंता जताई। डॉ. आनंदी जोशी, लक्ष्मी आर्या, महेश बराल, रचना शर्मा, तनुज भट्ट ने पहाड़ी, नेपाली भाषा में कविताओं का पाठ किया। वहां डॉ. सरस्वती कोहली, रोमी यादव, बलवंत, होशियार सिंह ज्याला आदि थे। संवाद
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