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मोरी : देवरा के कर्ण महाराज मंदिर में हुआ गेंदवा मेला
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 23 Jan 2026 05:28 PM IST
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साठी थोक ने मारी बाजी, मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पुरोला। मोरी तहसील क्षेत्र अंतर्गत सिंगतूर पट्टी के देवरा गांव स्थित कर्ण महाराज मंदिर में परंपरागत गेंदवा (हिंडोला) मेला संपन्न हो गया। मेले में पूजा-अर्चना के साथ ही श्रद्धा और उत्साह का नजारा देखने को मिला।
मेले के अवसर पर साठी व पांसाई थोकों के कर्ण एवं शैल्य महाराज के बजीर स्याणे ढोल-नगाड़ों के साथ गांव-गांव से मंदिर परिसर पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पारंपरिक खेल का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से जानवर की खाल से तैयार की गई गेंद से साठी-पांसाई थोकों के बीच खेल खेला गया।
खेल के माध्यम से हार-जीत का निर्णय किया जाता है जिसे क्षेत्र की खुशहाली और प्रगति का संकेत माना जाता है। खेले गए गेंदवा मेले में साठी थोक की विजय हुई। साठी थोक की ओर से ग्रामीण मेले में शामिल हुए। कर्ण महाराज के बजीर राजमोहन ने बताया कि हर वर्ष पौष मास के त्योहारों के बाद मकर संक्रांति के दिन सिंगतूर एवं गडूगाड़ पट्टियों के साठी-पांसाई थोकों के बीच यह पारंपरिक हिंडोला गेंदवा मेला आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर बाबूराम डिमरी गुराड़ी, वजीर बीरेंद्र रावत, राजेंद्र सिंह राणा, जगत सिंह पंवार, सोबत रांगड़ का योगदान रहा।
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पुरोला। मोरी तहसील क्षेत्र अंतर्गत सिंगतूर पट्टी के देवरा गांव स्थित कर्ण महाराज मंदिर में परंपरागत गेंदवा (हिंडोला) मेला संपन्न हो गया। मेले में पूजा-अर्चना के साथ ही श्रद्धा और उत्साह का नजारा देखने को मिला।
मेले के अवसर पर साठी व पांसाई थोकों के कर्ण एवं शैल्य महाराज के बजीर स्याणे ढोल-नगाड़ों के साथ गांव-गांव से मंदिर परिसर पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पारंपरिक खेल का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से जानवर की खाल से तैयार की गई गेंद से साठी-पांसाई थोकों के बीच खेल खेला गया।
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खेल के माध्यम से हार-जीत का निर्णय किया जाता है जिसे क्षेत्र की खुशहाली और प्रगति का संकेत माना जाता है। खेले गए गेंदवा मेले में साठी थोक की विजय हुई। साठी थोक की ओर से ग्रामीण मेले में शामिल हुए। कर्ण महाराज के बजीर राजमोहन ने बताया कि हर वर्ष पौष मास के त्योहारों के बाद मकर संक्रांति के दिन सिंगतूर एवं गडूगाड़ पट्टियों के साठी-पांसाई थोकों के बीच यह पारंपरिक हिंडोला गेंदवा मेला आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर बाबूराम डिमरी गुराड़ी, वजीर बीरेंद्र रावत, राजेंद्र सिंह राणा, जगत सिंह पंवार, सोबत रांगड़ का योगदान रहा।

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