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Uttarkashi News: घोड़ा पड़ाव पार्किंग को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से ठेके पर दिए जाने का विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 13 Mar 2026 07:14 PM IST
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घोड़ा पड़ाव पार्किंग को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से ठेके पर दिए जाने का विरोध
बड़कोट। यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्थल जानकीचट्टी में घोड़ा पड़ाव पार्किंग की ऊपरी मंजिल को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से ठेके पर दिए जाने की चर्चा से क्षेत्र के घोड़ा-खच्चर संचालकों और डंडी-कंडी मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है। मजदूर यूनियन से जुड़े लोगों का कहना है कि पार्किंग को ठेके पर देने से मजदूरों को मजबूरन रास्तों पर खड़ा रहना पड़ेगा।
उनका कहना है कि इससे यात्रा मार्ग पर अव्यवस्था फैलने के साथ ही जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, जिसका असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ सकता है। मजदूरों के अनुसार जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम के बीच हजारों मजदूरों और घोड़ा-खच्चरों के ठहरने के लिए यही एक प्रमुख स्थान बनाया गया था। विशेष रूप से घोड़ा-खच्चर संचालकों और डंडी-कंडी मजदूरों के ठहराव की व्यवस्था इसी घोड़ा पड़ाव में की गई थी। मजदूर यूनियन से जुड़े मंगल सिंह, प्रमोद, विजयपाल, मुन्ना और स्थानीय निवासी प्रताप सिंह का कहना है कि यह निर्णय मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात है। उन्होंने जिला प्रशासन और जिला पंचायत से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो क्षेत्र के मजदूर और स्थानीय लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में प्रभारी एमएमए श्याम लाल का कहना है कि जिला पंचायत के एक्ट के अनुसार यह देखा जाएगा कि क्या मजदूरों के लिए सुरक्षित स्थान और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था का प्रावधान है। यदि ऐसा कोई प्रावधान होगा तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने कहा कि मजदूरों के हित में मामले का संज्ञान लिया जाएगा।
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उनका कहना है कि इससे यात्रा मार्ग पर अव्यवस्था फैलने के साथ ही जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, जिसका असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ सकता है। मजदूरों के अनुसार जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम के बीच हजारों मजदूरों और घोड़ा-खच्चरों के ठहरने के लिए यही एक प्रमुख स्थान बनाया गया था। विशेष रूप से घोड़ा-खच्चर संचालकों और डंडी-कंडी मजदूरों के ठहराव की व्यवस्था इसी घोड़ा पड़ाव में की गई थी। मजदूर यूनियन से जुड़े मंगल सिंह, प्रमोद, विजयपाल, मुन्ना और स्थानीय निवासी प्रताप सिंह का कहना है कि यह निर्णय मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात है। उन्होंने जिला प्रशासन और जिला पंचायत से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो क्षेत्र के मजदूर और स्थानीय लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में प्रभारी एमएमए श्याम लाल का कहना है कि जिला पंचायत के एक्ट के अनुसार यह देखा जाएगा कि क्या मजदूरों के लिए सुरक्षित स्थान और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था का प्रावधान है। यदि ऐसा कोई प्रावधान होगा तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने कहा कि मजदूरों के हित में मामले का संज्ञान लिया जाएगा।
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