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Uttarkashi News: बर्फबारी के कारण एक दिन पहले लौटे छात्र, यादों में सिमटा हिमालय का अनुभव
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 17 Mar 2026 07:53 PM IST
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40 छात्र-छात्राओं का दल ने की 15 किमी की ट्रैकिंग
उत्तरकाशी। समुद्रतल से करीब 3100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डोडीताल में बर्फबारी होने के कारण 40 सदस्यीय छात्रों के दल को एक दिन पूर्व ही लौटना पड़ा। अपने तीन दिवसीय कैपिंग के दौरान इन छात्र-छात्राओं ने प्रकृति के बीच नेतृत्व, टीमवर्क और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण कौशल की बारीकियों की जानकारी भी ली।
अगोड़ा के पर्यटन व्यवसायी राजेश पंवार ने बताया कि तीन दिन पूर्व गुरुग्राम के 40 छात्र-छात्राओं का दल 15 किमी की ट्रैकिंग कर डोडीताल पहुंचे। वहां पर उन्होंने आउटडोर सर्वाइवल स्किल्स जैसे कि पहाड़ों में सुरक्षित ट्रैकिंग, टीम नेविगेशन, कैंप लगाना, संसाधनों का प्रबंधन और आपात स्थितियों में निर्णय लेने जैसे कौशल का प्रशिक्षण लिया।
कार्यक्रम के संचालक मिन्हाल ज़ैदी ने कहा कि हिमालय जैसे वातावरण में सीखना छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत प्रभावी होता है। उनके अनुसार, जब छात्र पहाड़ों में सीमित संसाधनों के साथ टीम के रूप में काम करते हैं, तब वे नेतृत्व, जिम्मेदारी और सहयोग की असली समझ विकसित करते हैं।
राजेश पंवार ने बताया कि बीते रविवार से डोडीताल में बर्फबारी के कारण इस दल को अपने निश्चित दिन से एक दिन ही पूर्व सोमवार देर शाम को अगोड़ा लौटना पड़ा। उसके बाद इन छात्रों ने अगोड़ा गांव में मंगलवार को ग्रामीणों से पहाड़ की जीवनशैली की बारीकियों की जानकारी ली। साथ ही यहां की संस्कृति और परंपरा से भी रुबरु हुए।
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उत्तरकाशी। समुद्रतल से करीब 3100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डोडीताल में बर्फबारी होने के कारण 40 सदस्यीय छात्रों के दल को एक दिन पूर्व ही लौटना पड़ा। अपने तीन दिवसीय कैपिंग के दौरान इन छात्र-छात्राओं ने प्रकृति के बीच नेतृत्व, टीमवर्क और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण कौशल की बारीकियों की जानकारी भी ली।
अगोड़ा के पर्यटन व्यवसायी राजेश पंवार ने बताया कि तीन दिन पूर्व गुरुग्राम के 40 छात्र-छात्राओं का दल 15 किमी की ट्रैकिंग कर डोडीताल पहुंचे। वहां पर उन्होंने आउटडोर सर्वाइवल स्किल्स जैसे कि पहाड़ों में सुरक्षित ट्रैकिंग, टीम नेविगेशन, कैंप लगाना, संसाधनों का प्रबंधन और आपात स्थितियों में निर्णय लेने जैसे कौशल का प्रशिक्षण लिया।
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कार्यक्रम के संचालक मिन्हाल ज़ैदी ने कहा कि हिमालय जैसे वातावरण में सीखना छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत प्रभावी होता है। उनके अनुसार, जब छात्र पहाड़ों में सीमित संसाधनों के साथ टीम के रूप में काम करते हैं, तब वे नेतृत्व, जिम्मेदारी और सहयोग की असली समझ विकसित करते हैं।
राजेश पंवार ने बताया कि बीते रविवार से डोडीताल में बर्फबारी के कारण इस दल को अपने निश्चित दिन से एक दिन ही पूर्व सोमवार देर शाम को अगोड़ा लौटना पड़ा। उसके बाद इन छात्रों ने अगोड़ा गांव में मंगलवार को ग्रामीणों से पहाड़ की जीवनशैली की बारीकियों की जानकारी ली। साथ ही यहां की संस्कृति और परंपरा से भी रुबरु हुए।