छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दुबचेरा (गुरूर ब्लॉक) में परमार्थ की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और गरीबों की तकलीफ को देखकर 90 वर्षीय कबीरपंथी संत गुरु सुख दास साहेब ने अपनी पूरी संपत्ति और जीवनभर की जमा-पूंजी बेचकर गांव में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल भवन खड़ा कर दिया। इस नेक काम के लिए ग्रामीणों ने भी आधा एकड़ जमीन दान में दी। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी तकनीकी मदद के संत साहेब ने इस भवन को बिल्कुल सरकारी अस्पताल के ब्लूप्रिंट पर तैयार किया है, जिसमें ओपीडी, आईसीयू, जनरल वार्ड, लैब और दवा स्टोर की आधुनिक व्यवस्था की गई है।
3 साल से लटका है ताला
बुजुर्ग संत ने अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई लगाकर साल 2023 में ही इस इमारत को मुकम्मल कर दिया था, लेकिन पिछले तीन साल से यह अस्पताल सरकारी ताले में बंद है। स्थानीय प्रशासन से लेकर मंत्रालय तक गुहार लगाई जा चुकी है, मगर फाइलें दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। 90 वर्ष के हो चुके संत साहेब की ढलती सांसें अब सिर्फ इस उम्मीद में टिकी हैं कि वे अपनी मौत से पहले इस अस्पताल को शुरू होता देख सकें।
किसने क्या कहा
विभाग से बिना पूछे भवन बनाया गया था। फिलहाल सारी जानकारी प्रदेश मुख्यालय को भेज दी गई है। अस्थायी व्यवस्था के लिए जल्द ही दो डॉक्टर भेजे जाएंगे।
— डॉ. जे. एल. उइके, CMHO
साहेब जी ने लोगों की जान बचाने के लिए अपना सर्वस्व फूंक दिया। सरकार को इस त्याग का सम्मान करते हुए तुरंत अस्पताल शुरू करना चाहिए, वरना ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।
— दिनेंद्र साहेब, संत के शिष्य

संत ने बनाया अस्पताल- फोटो : credit
संत ने बनाया अस्पताल- फोटो : credit
संत ने बनाया अस्पताल- फोटो : credit