राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर स्थित सोनपैरी में असंग देव कबीर आश्रम में बुधवार को एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर देशभर में मंडल स्तर पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का शताब्दी वर्ष किसी उत्सव का नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज सेवा को नई गति देने का अवसर है। इसी उद्देश्य से स्वयंसेवक ‘पंच परिवर्तन’ के विषय को लेकर समाज के बीच जा रहे हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि संघ केवल संकटों पर चर्चा नहीं करता, बल्कि उनके समाधान पर भी विचार रखता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित और मजबूत रहेगा तो किसी भी संकट का प्रभाव सीमित रहेगा। बांग्लादेश सहित विश्व के कई हिस्सों में मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह समय बंटने का नहीं, बल्कि संगठित होने का है।
सर संघचालक ने कहा कि देश में जब भी कोई आपदा आती है, सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुटे नजर आते हैं। यह कार्य बिना किसी प्रचार-प्रसार के किया जाता है।
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान संघ के स्वयंसेवक समाज को पांच व्यवहारिक विषयों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। स्वयंसेवकों ने इन ‘पंच परिवर्तन’ को पहले अपने जीवन में अपनाया है। इन पांच बिंदुओं को व्यवहार में लाकर राष्ट्र और समाज की उन्नति में सहभागी बना जा सकता है।