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Delhi: शाहदरा साइबर सेल की बड़ी कार्रवाई, शादी के नाम पर ठगी करने वाला गैंग पकड़ा, सरगना ग्वालियर से गिरफ्तार
शाहदरा साइबर सेल ने शादी कराने के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक साइबर गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के सरगना को ग्वालियर मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रदीप सिंह उर्फ प्रदीप साहू के रूप में हुई है। आरोपी ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आजमगढ़ सहित कई जगहों पर फर्जी कॉल सेंटरों का नेटवर्क चलाकर लोगों से शादी से जुड़ी सेवाएं देने के नाम पर ठगी करता था।
जिला पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा ने बताया कि पिछले साल अक्तूबर में ईस्ट आजाद नगर निवासी राज ने ठगी की शिकायत की, जिसमें उसने बताया कि फेसबुक ब्राउज करते समय उन्हें शादी से जुड़ी सेवाओं का एक विज्ञापन दिखाई दिया था। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और शादी कराने की सेवा देने का भरोसा दिलाया। आरोपियों की बातों में आकर शिकायतकर्ता ने उनके दिए गए क्यूआर कोड के जरिए करीब 81 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि शादी करवाने के नाम पर उनसे धोखाधड़ी की गई है।
निरीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम ने उस बैंक खाते की जांच की, जिसमेंं ठगी की रकम गई थी। रकम ग्वालियर के शालिनी शिवरे के खाते में ट्रांसफर हुई थी। पुलिस ने बैंक खाते में दिए पते की जांच करने के लिए ग्वालियर पहुंची, जहां राजकुमारी नाम की महिला एक कॉल सेंटर चला रही थी।पूछताछ में राजकुमारी ने खुलासा किया कि रिश्ते गाइड सर्विसेज नाम से चल रहे कॉल सेंटर का असली संचालक प्रदीप साहू है और वह उसी के निर्देशों पर काम करती है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी पर ग्वालियर में छापेमारी कर प्रदीप साहू को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। उसने अलग-अलग राज्यों में लगभग 14 कॉल सेंटर खोले हुए थे। इन सेंटरों में कर्मचारियों को विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया जाता था और उन्हें शादी की सेवाएं लेने वाले लोगों से संपर्क कर ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। गिरोह के कर्मचारी पीड़ितों को शादी कराने, प्रोफाइल एक्टिवेट करने और रजिस्ट्रेशन के नाम पर भरोसे में लेते थे।
इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन चार्ज और अन्य फर्जी सर्विस चार्ज के नाम पर पैसे वसूलते थे। सरगना ने कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि वह कम से कम पीड़ितों से 5 हजार से 10 हजार रुपये तक ही ठगी करें, ताकि पीड़ित शिकायत करने में हिचके। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। जांच में अब तक आठ संदिग्ध लेन-देन की बात सामने आई है। पुलिस गैंग के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।
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