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झज्जर: किसान संगठनों ने मार्केट कमेटी कार्यालय का घेराव कर दिया धरना
हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर विभिन्न किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने स्थानीय अनाज मंडी की मार्केट कमेटी के कार्यालय का घेराव किया और 11 बजे से 2 बजे तक धरना दिया।
ये धरना रबी फसलों की खरीद पर लगाई गई बेतुकी शर्तों-नए नियमों को वापस लेने, मंडियों में उठान प्रक्रिया तेज करने, 72 घंटे में किसानों को भुगतान करने व बेमौसमी बारिश, तूफ़ानी हवाओं और ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों का जल्द मुआवजा देने, पिछले सीज़न की फसलों की बर्बादी के बकाया मुआवजे का भुगतान करने और आगजनी की घटनाओं से जल कर ख़ाक हुई गेहूँ आदि की फसलों का 60 हज़ार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग को लेकर दिया गया।
इस अवसर पर धरना दे रहे किसानों को एसकेएम की नेशनल कॉओर्डिनेशन कमेटी के सदस्य जयकरण मांडौठी, जिला कमेटी सदस्य सुरेंद्र सिवाच, कैप्टन चरण सिंह, जगबीर सिंह, सुनील कुमार माजरा, दिलबाग सिंह दलाल, सुमित छिकारा, रमेश जाखड़, रमेश फौगाट, राजेंद्र जुलाना ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा मंडी में फसल बिक्री के नये नियम ज़बरदस्ती लागू किए जा रहे हैं।इसके पीछे सरकार की मंशा न केवल किसानों को तंग करने की है बल्कि इसके माध्यम से सरकार मंडियों को बंद करना चाहती है।ये सब ऑनलाइन पोर्टल और खरीद में बायोमेट्रिक प्रणाली किसानों को सुविधाओं से वंचित करने की है। नई शर्तों से फसल खरीद में देरी हो रही है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की ख़ामियां और तकनीकी दिक़्क़तों के कारण किसानों को गेटपास के लिए बड़ी बड़ी लाइनें लगाकर घंटों खड़ा रहना पड़ता हैं, जिससे किसानों को अपनी ही फसल बेचने में काफी परेशानी हो रही है।
उन्होंने बताया कि उठान न होने से मंडियों में गेंहू के ढेर लगे हुए हैं और तिल डालने की जगह भी नहीं है।पिछले दिनों हुई बारिश से मंडियों में लाखों क्विंटल गेंहू , सरसों की फसलें खराब हो चुकी हैं।यह किसानों के साथ साथ राष्ट्र को नुकसान पहुँचा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने किसानों को 72 घंटे में भुगतान करने का वायदा कर रखा है, परंतु उठान नहीं होने के कारण 10-10 दिन तक भुगतान नहीं हो रहा है। इस धरने में ओमबीर सिंह, राजपाल, पूर्णमल बिरघाना, रणबीर, बलवान, पवन माजरा, सतपाल कादियान व कई अन्य किसान शामिल रहे।
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