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जींद: मौनी अमावस्या पर पिंडतारक तीर्थ में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
पांडू पिंडारा स्थित प्रसिद्ध पिंडतारक तीर्थ पर मौनी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में रविवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई और पिंडदान व तर्पण कर अपने पितरों की आत्मा की शांति तथा मोक्ष की कामना की।
मौनी अमावस्या से एक दिन पहले शनिवार शाम से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। रात भर धर्मशालाओं में भजन-कीर्तन और सत्संग का सिलसिला चलता रहा। सरोवर के घाटों पर स्नान और पिंडदान की प्रक्रिया आरंभ हुई, जो दोपहर बाद तक निरंतर जारी रही। श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। जयंती देवी मंदिर के पुजारी ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि युद्ध के बाद पांडवों ने यहां अपने पूर्वजों की शांति के लिए तपस्या कर सोमवती अमावस्या के दिन पिंडदान किया था। तभी से यह तीर्थ पिंडदान के लिए विशेष महत्व रखता है और यहां किए गए कर्मकांड से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
ठंड और धुंध के बावजूद सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल पूरे दिन तैनात रहा। महिला घाटों पर महिला पुलिसकर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई थी। घाटों पर फिसलन से बचाव के लिए पिंडदान की अलग व्यवस्था की गई, वहीं यातायात सुचारू रखने के लिए पार्किंग प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया।
अमावस्या के अवसर पर तीर्थ परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। जगह-जगह लगे फड़ों पर श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। पुजारी नवीन शास्त्री के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। मौनी अमावस्या पर किया गया पुण्य कई गुना फलदायी माना जाता है।
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