Hindi News
›
Video
›
Haryana
›
Mahendragarh/Narnaul News
›
Primary school operating from a borrowed building after shifting out of a dilapidated one; children kept away from the overhang due to the risk of electric shock.
{"_id":"6a85ab84c4c185e9af094c2a","slug":"video-primary-school-operating-from-a-borrowed-building-after-shifting-out-of-a-dilapidated-one-children-kept-away-from-the-overhang-due-to-the-risk-of-electric-shock-2026-08-19","type":"video","status":"publish","title_hn":"जर्जर भवन से उधार के भवन में चल रही प्राथमिक पाठशाला, छज्जे में करंट के डर से बच्चों को रखा जा रहा दूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जर्जर भवन से उधार के भवन में चल रही प्राथमिक पाठशाला, छज्जे में करंट के डर से बच्चों को रखा जा रहा दूर
नारनौल। मोहल्ला चौधरियान स्थित प्राथमिक पाठशाला के बच्चे करीब एक माह से गौड़ ब्राह्मण सभा में पढ़ाई कर रहे हैं। क्योंकि पाठशाला भवन को तो डेढ़ साल पहले ही जर्जर घोषित कर दिया था। लेकिन बच्चों की सुरक्षा का ध्यान अधिकारियों को एक माह पहले ही आया और पाठशाला को सामने स्थित गौड़ ब्राह्मण सभा में शिफ्ट करने का मौखिक आदेश दिया।
ऐसे में विभाग को हरकत में आने में 17 माह का समय लगा और जब तक बच्चे जर्जर भवन के खुले बरामदे में पढ़ते रहे। पाठशाला को शिफ्ट करने के बाद भी जर्जर भवन ज्यों-का-त्यों खड़ा है और वहां अब भी बच्चों के लिए मिड-डे-मिल वर्कर खाना बना रही हैं।
बंद पंखे और दरी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चे :
पाठशाला को शिफ्ट करने के बाद भी बच्चों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई है। सभा की प्रथम मंजिल में पाठशाला संचालित की जा रही है। सभा के प्रथम मंजिल में बने कमरे छोटे हैं, इसलिए बरामदे में कक्षा लगाई जाती है। बैठने के लिए बेंच नहीं होने के कारण बच्चे दरी पर बैठकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं दो बरामदों में 3 पंखे लगे हुए है, जिसमें से एक पंखा भी खराब है और मासूम ऐसे ही हालात में पढ़ने को मजबूर हैं।
छज्जे में आता है करंट, ताकि दूर रहें बच्चे:
सभा की प्रथम मंजिल में बरामदे के चारों ओर मात्र डेढ़ फीट ऊंचा छज्जा बना हुआ है। जहां से खेलते समय बच्चों का नीचे गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में शिक्षकों ने बच्चों को छज्जे से दूर रखने लिए कह रखा है कि छज्जे में करंट आता है। जो शिक्षा विभाग की सुस्ती की पराकाष्ठा को दिखाता है।
एक साल में 20 प्रतिशत तक घटी बच्चों की संख्या :
इसी अव्यवस्था के कारण अभिभावक भी बच्चों को पाठशाला भेजने में परहेज कर रहे हैं। एक साल में बच्चों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। पाठशाला में बाल वाटिका से कक्षा 5 तक के करीब 63 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं एक साल पहले पाठशाला में करीब 75 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।
बच्चों ने कहा बनना चाहते हैं फौजी :
पाठशाला में पढ़ने वाले छोटे बच्चों से जब पूछा गया कि बड़े होकर क्या बनना चाहते हो तो अधिकतर बच्चों ने एक सुर में फौजी बनने का नाम लिया। लेकिन बच्चों के सपने पूरा करने की जिम्मेदारी जिस व्यवस्था पर है, वहीं सपनों के बीच बाधा बनने का कार्य कर रही है।
वर्जन :
मोहल्ला चौधरियान स्थित प्राथमिक पाठशाला के जर्जर भवन को ढहा कर, नए भवन के निर्माण के लिए एस्टीमेट तैयार किया गया है। एस्टीमेट को मुख्यालय भेजा गया है, बजट पास होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
अशोक कुमार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।