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रेवाड़ी: क्रोनिक बीमारियों के मरीजों का होम्योपैथी की ओर बढ़ा रुझान, रोज 50-60 पहुंच रहे ओपीडी
हर वर्ष 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथिक दिवस मनाया जाता है। इस बार ‘होम्यो परिवार-सर्वजन स्वास्थ्य’ थीम के साथ यह दिवस मनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि होम्योपैथिक दवाइयों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर और इसकी सफलता दर को सामने लाकर कई बीमारियों का प्रभावी उपचार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लोगों को इस पद्धति के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। शहर के नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक ओपीडी में प्रतिदिन करीब 50 से 60 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज क्रोनिक यानी लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से पीड़ित हैं, जो अन्य चिकित्सा पद्धतियों से इलाज कराने के बाद अब होम्योपैथिक उपचार की ओर रुख कर रहे हैं। इन दवाओं के दुष्प्रभाव कम होते हैं और यह बीमारी की जड़ तक पहुंचकर इलाज करती हैं। यही कारण है कि पहले के मुकाबले अब लोगों का इस पद्धति की ओर रुझान बढ़ रहा है।
जोड़ों के दर्द से लेकर महिलाओं की बीमारियों तक इलाज:
होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. गोविंद शर्मा ने बताया कि ओपीडी में सबसे अधिक मरीज जोड़ों के दर्द, माइग्रेन, सिर दर्द और नजले की समस्या लेकर आते हैं। इसके अलावा त्वचा रोग, एलर्जी, पाचन संबंधी, सांस की बीमारियां, बीपी-शुगर, प्रोस्टेट, पाइल्स और महिलाओं से जुड़ी समस्याएं जैसे पीसीओडी, बच्चेदानी में गांठ, पीरियड अनियमितता और सफेद पानी की समस्या के मरीज भी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
समय रहते सही उपचार लिया जाए तो होम्योपैथिक पद्धति से सफल इलाज:
विशेषज्ञ डॉ. गोविंद शर्मा का मानना है कि लोगों में अभी भी होम्योपैथिक इलाज को लेकर कई तरह के भ्रम हैं। कुछ लोग इसे धीमी प्रक्रिया मानते हैं, यदि समय रहते सही उपचार लिया जाए तो होम्योपैथिक पद्धति से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में ही मरीज अगर होम्योपैथिक उपचार अपनाएं तो बीमारी को जल्दी नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय पर उचित इलाज कराएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति सुरक्षित और प्रभावी है, बशर्ते इसे सही तरीके से और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार लिया जाए।
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