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Bilaspur: बिलासपुर नप में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित
अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान और शहरी विकास विभाग हिमाचल प्रदेश के सहयोग से नगर परिषद बिलासपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छ सर्वेक्षण विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देना और स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर परिणाम प्राप्त करना रहा। प्रशिक्षण सत्र का संचालन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ प्रवीण भारद्वाज ने किया।उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कचरा प्रबंधन से जुड़ी उपयोगी एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दौरान घर-घर कचरा पृथक्करण, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इक_ा करना, गीले कचरे से खाद बनाना, सूखे कचरे का पुनर्चक्रण, प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निपटान और एकल उपयोग प्लास्टिक को कम करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। सफाई कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनकी सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के उपयोग और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि गीला कचरा हरे डस्टबिन और सूखा कचरा नीले डस्टबिन में डालना चाहिए, जिससे सफाई व्यवस्था बेहतर होती है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत नागरिक फीडबैक, नवाचार, व्यवहार परिवर्तन और निरंतर स्वच्छता गतिविधियों पर भी जानकारी दी गई और नगर परिषद बिलासपुर के लिए उपयोगी सुझाव साझा किए गए। नप बिलासपुर के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी वर्षा चौधरी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का मुख्य लक्ष्य शहरों को कचरा मुक्त बनाना और नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। इसके लिए नगर परिषद अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है योजनाओं का क्रियान्वयन उन्हीं के माध्यम से होता है। वहीं अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम अधिकारियों को नई नीतियों, दिशानिर्देशों और नवाचारों से अवगत कराते हैं। इससे न केवल शहरी स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इससे उन्हें अपने-अपने शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
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