Hindi News
›
Video
›
India News
›
BSP knocks on Dalit vote bank! Will Tejaswi's dream of becoming CM be shattered?
{"_id":"686fdb304b134fff7a0099a2","slug":"bsp-knocks-on-dalit-vote-bank-will-tejaswi-s-dream-of-becoming-cm-be-shattered-2025-07-10","type":"video","status":"publish","title_hn":"दलित वोट बैंक पर BSP की दस्तक! टूट जाएगा तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनने का सपना?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
दलित वोट बैंक पर BSP की दस्तक! टूट जाएगा तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनने का सपना?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Thu, 10 Jul 2025 08:54 PM IST
बिहार की राजनीति में कुछ ऐसा हुआ है… जिसकी आहट से सत्ता के गलियारे तक हिल गए हैं… एक ऐसा एलान हुआ है, जिसने विपक्ष के भीतर ही डर पैदा कर दिया है…एक ऐसा नाम उभरा है, जो अब तक सिर्फ भाषणों में गूंजता था,लेकिन अब…सीधे-सीधे सीएम की कुर्सी के सपने पर भारी पड़ने की तैयारी में है।
क्या तेजस्वी यादव का सपना अब अधूरा रह जाएगा? क्या महागठबंधन के सबसे मजबूत वोट बैंक में सेंध लग चुकी है? और क्या एक नई पार्टी नहीं, बल्कि एक नया चेहरा दलित राजनीति की तस्वीर को पूरी तरह पलटने वाला है?
इस वीडियो में हम खोलने जा रहे हैं बिहार चुनाव 2025 का वो पॉलिटिकल पासवर्ड, जो ना सिर्फ RJD की रणनीति को चुनौती देता है, बल्कि NDA को अप्रत्याशित बढ़त दिला सकता है।
कहानी शुरू होती है पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल से… जहां सिर्फ फूलों की माला नहीं, बल्कि पूरे सियासी खेल का रंग बदलने वाली बात हुई और वो भी सिक्कों से तौले गए एक शख्स के नाम पर।
तो चलिए करते है शुरू और आपको बताते है किसके सपनों के बीच आया कौन? क्या है BSP की एंट्री से तेजस्वी यादव के सपनों के टूटने की कहानी!
बिहार की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की एंट्री कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं, बल्कि एक सुनामी जैसी प्रतीत हो रही है – खासकर तब, जब यह कदम राज्य के सबसे निर्णायक वोट बैंक यानी दलित मतदाताओं को केंद्र में रखकर उठाया गया है।
BSP के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती के मौके पर पटना में न सिर्फ एक भव्य आयोजन किया, बल्कि मंच से ऐलान कर दिया कि पार्टी बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी।
यह एलान जितना तेज था, उतनी ही गूंज उसने उन दलों के गलियारों में छोड़ी है जो अब तक दलित वोट बैंक को अपने पाले में मानते रहे – खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD)। और अब सवाल यही उठ रहा है- अगर आकाश आनंद दलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं, तो क्या तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा?
इससे पहले की आगे की कहानी से आपको रूबरू करवाऊं चलिए पहले आपको बताते है बिहार विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक का महत्व। और इस दलित वोट बैंक को लेकर RJD की क्या रणनीति है?
बिहार की आबादी में दलितों की हिस्सेदारी करीब 16% है। यह आंकड़ा किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। खासकर जब ये वोट एकमुश्त किसी एक दल के पक्ष में चले जाएं।
अब तक यह देखा गया है कि बिहार में RJD को यादव-मुस्लिम गठजोड़ (MY समीकरण) के साथ-साथ दलितों का एक हिस्सा भी समर्थन देता रहा है। लेकिन दलित वोटों में कभी भी RJD को पूर्ण समर्थन नहीं मिला।
इस वर्ग में खासकर पासवान, मुसहर, धोबी जैसे समूह शामिल हैं, जिनमें से कुछ पर चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और अन्य दलों का प्रभाव भी देखा गया है।
RJD के लिए दलित वोटों की मौजूदगी “साइलेंट सपोर्ट” की तरह रही है — न बहुत मुखर, न बहुत मजबूत — लेकिन जितने भी मिले, वो उसकी जीत में योगदान देते रहे। अब यही वोट बैंक खिसकने के संकेत दे रहा है।
आकाश आनंद ने पटना के आयोजन में बेहद स्पष्ट और आक्रामक स्वर में कहा कि “बहुजन समाज अब किसी और की बैसाखी नहीं, खुद नेतृत्व करेगा।” उनका यह बयान सीधे-सीधे उन दलों के लिए चुनौती है जो वर्षों से दलितों के नाम पर सत्ता के गलियारे तक पहुंचते रहे हैं।
BSP का यह एलान – कि वह बिहार की हर सीट पर “फुल फ्रंट एंट्री” के साथ मैदान में उतरेगी – एक सामाजिक नहीं, राजनीतिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है।
अगर BSP, खासकर दलित बहुल इलाकों में 5% से 10% वोट भी हासिल करने में सफल होती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान RJD को होगा। क्योंकि ये वही सीटें हैं जहां बहुजन + पिछड़ा + मुस्लिम गठजोड़ पर उसका दावा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BSP अकेले सत्ता में न पहुंचे, लेकिन वह “कटिंग फैक्टर” बन सकती है। यानी BSP के उतरने से RJD और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगेगी, जिसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।
2020 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर NDA और महागठबंधन के बीच का अंतर बहुत कम था – कई बार 2000-3000 वोटों से हार-जीत तय हुई। अगर BSP इन सीटों पर दलित वोटों में 3% से 5% की सेंध लगा ले, तो RJD को झटका लगना तय है।
और यह झटका सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के सपने का होगा।
भले ही BSP का अब तक बिहार में कोई बड़ा चुनावी रिकॉर्ड न रहा हो, लेकिन पार्टी धीरे-धीरे संगठनात्मक स्तर पर मजबूत हो रही है। खासकर दलित बहुल इलाकों में मंडल सम्मेलन, भीम चौपाल और छोटे-छोटे जनसंपर्क अभियानों के जरिए BSP ने जो जमीन तैयार की है, वह अब रंग दिखा सकती है।
BSP जानती है कि बिहार में केवल जाति का समीकरण नहीं, बल्कि जमीनी पकड़ और संदेश भी मायने रखता है।
इस बार BSP ने सिर्फ नेता नहीं, नए चेहरे और नई भाषा में उतरने की रणनीति अपनाई है – और इस बदलाव का चेहरा हैं आकाश आनंद।
बिहार की दलित राजनीति में इस समय तीन प्रमुख दावेदार हैं:
1. चिराग पासवान – पासवान वोट पर पकड़, लेकिन अकेले दम पर सीमित प्रभाव।
2. जीतनराम मांझी – मुसहर वोट पर दावा, लेकिन पार्टी संगठन कमजोर।
3. BSP और आकाश आनंद – सभी दलित समुदायों को साथ लाने का प्रयास, और मायावती की “सामाजिक इंजीनियरिंग” मॉडल की तर्ज पर विस्तार।
अब तक जहां चिराग और मांझी जातीय प्रभाव तक सीमित रहे हैं, वहीं BSP संपूर्ण दलित राजनीति को एकजुट करने का प्रयास कर रही है। यही कोशिश अगर थोड़ी भी सफल होती है, तो RJD की वोट बैंक रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।
BSP की एंट्री सिर्फ एक दल की वापसी नहीं, बल्कि एक वैचारिक चुनौती है उन दलों के लिए जो सामाजिक न्याय की राजनीति करते रहे हैं, लेकिन नेतृत्व साझा नहीं करना चाहते।
अगर आकाश आनंद दलित युवाओं और मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने में सफल हो जाते हैं कि BSP ही उनका असली प्रतिनिधि है, तो बिहार की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
RJD के लिए यह खतरे की घंटी है और अगर दलित वोट बैंक बिखरता है, तो तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री बनने की राह और भी मुश्किल हो जाएगी।
एक बात तय है, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब सामाजिक न्याय बनाम नेतृत्व की असली परीक्षा बनने जा रहा है।
और इस परीक्षा में अगर BSP पास हो गई, तो किसी और का सपना अधूरा रह सकता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।