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Jammu and Kashmir: CJI गवई ने क्यों कहा- 'पहलगाम में जो हुआ उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते'
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: सुरेश शाह Updated Thu, 14 Aug 2025 09:27 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर भी गौर किया कि फैसला लेने की प्रक्रिया में कई बातों पर विचार किया जाता है। पीठ ने शिक्षाविद जहूर अहमद भट और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद मलिक की ओर से दायर याचिका को आठ हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की ओर से जल्द सुनवाई की मांग पर सीजेआई ने कहा, 'पहलगाम में जो हुआ उसे आप नजरअंदाज नहीं कर सकते। फैसला संसद और कार्यपालिका को लेना है।'
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि पहले भी अदालत ने ऐसी याचिकाओं पर जुर्माना लगाया है। मेहता ने कहा, 'चुनाव होते रहते हैं, माननीय न्यायाधीश देश के इस हिस्से में उभर रही अजीबोगरीब स्थिति से अवगत हैं और निर्णय लेने में कई बातों का ध्यान रखना होता है।'
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