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कानून की छात्रा से दुष्कर्म, पीड़िता ने FIR में बताई आपबीती।
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 28 Jun 2025 09:31 AM IST
पूर्वी कोलकाता के एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर कर रख दिया है। साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ जो हुआ, वह न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्ता की छांव में पल रहे कुछ दरिंदे अब खुलेआम कानून का मजाक उड़ाने लगे हैं।
इस दर्दनाक वारदात की शुरुआत होती है 25 जून की शाम से। समय करीब 7:30 बजे का था जब एक युवती अपने कॉलेज के यूनियन रूम में थी। वहां पहले से मौजूद कुछ छात्र नेताओं ने उसे बातचीत के बहाने रोका, लेकिन जो हुआ वह किसी भी लड़की की जिंदगी को हमेशा के लिए तोड़ देने वाला था।
पीड़िता का बयान बताता है कि उसे कॉलेज के छात्र संगठन के नेता जे (काल्पनिक नाम) ने पहले तो शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन जब उसने इंकार कर दिया तो वही ‘दादा’ दरिंदा बन गया। पहले प्यार का ढोंग, फिर धमकी और फिर घंटों तक क्रूरता की इंतहा। पीड़िता ने बताया कि उसे जबरन यूनियन रूम के अंदर कैद किया गया, और वहां तीन घंटे से ज्यादा समय तक उसका शारीरिक शोषण किया गया।
जब मुख्य आरोपी जे उसका बलात्कार कर रहा था, तब ‘एम’ और ‘पी’ नामक दो अन्य छात्र वहां मौजूद थे और पूरे कृत्य का वीडियो बना रहे थे। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि जब वह सांसों के लिए तड़प रही थी, तब भी किसी ने उसे नहीं छोड़ा। उल्टे उसे धमकाया गया कि अगर वह किसी से बोलेगी तो उसके बॉयफ्रेंड का मर्डर कर दिया जाएगा।
पीड़िता के मुताबिक, जब वह मदद की गुहार लगाती रही, तब कॉलेज का गार्ड भी मूकदर्शक बना रहा। कॉलेज परिसर में तीन घंटे तक चले इस क्रूर अपराध को किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की। यूनियन रूम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया गया था। पीड़िता को हॉकी स्टिक से पीटने की धमकी दी गई, उसके शरीर को बुरी तरह नोचा गया और अंत में उसे अधमरा छोड़ दिया गया।
10:50 बजे किसी तरह वह बाहर निकली और अपने पिता को फोन कर बुलाया। उसने पिता को पूरी बात बताई, लेकिन पुलिस में जाने की हिम्मत उसी समय नहीं जुटा पाई। पीड़िता ने लिखा कि जे की राजनीतिक ताकत और कॉलेज पर उसकी पकड़ को देखते हुए वह डर गई थी। लेकिन अगले दिन, 26 जून को, उसने साहस दिखाया और कस्बा थाने में जाकर पूरी घटना की एफआईआर दर्ज कराई।
एफआईआर में जे, एम और पी—तीनों के नाम दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए पहले दो आरोपियों को तालबगान से और तीसरे को देर रात गिरफ्तार कर लिया। तीनों को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 1 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पीड़िता का बयान रूह कंपा देने वाला है। उसने बताया कि जे ने पहले उसे शादी के नाम पर फंसाने की कोशिश की, और जब वह तैयार नहीं हुई तो उसे ‘विश्वास की परीक्षा’ देने को मजबूर किया गया। इस ‘विश्वास की परीक्षा’ के नाम पर उसके साथ बलात्कार की योजना बनाई गई थी। पीड़िता ने बताया कि कैसे दरवाजा बंद करके उसका दम घोंटने तक की कोशिश की गई। उसे इनहेलर की जरूरत थी, लेकिन उसकी हालत का मजाक उड़ाया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी टीएमसीपी (तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद) का कॉलेज इकाई प्रमुख है और उसका सीधा संबंध सत्तारूढ़ दल के नेताओं से बताया जा रहा है। यही कारण है कि कॉलेज प्रशासन पूरी तरह खामोश है और छात्र नेता अब भी कॉलेज के अन्य छात्रों पर दबाव बना रहे हैं कि इस मामले में चुप रहें।
कोलकाता नेशनल मेडिकल कॉलेज में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण हो चुका है और पुलिस ने गवाहों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने बंगाल की राजनीति को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। सवाल यह है कि क्या सत्ता का छात्र संगठन किसी भी लड़की की अस्मिता से खेलने का लाइसेंस बन गया है?
पीड़िता ने अपने एफआईआर के अंतिम हिस्से में लिखा—
“एक कानून की छात्रा के रूप में मुझे यह विश्वास था कि न्याय सबसे ऊपर होता है। लेकिन आज मैं खुद एक पीड़िता हूं। मुझे इंसाफ चाहिए। जे, एम और पी को सजा मिलनी ही चाहिए।”
अब इस घटना ने ना सिर्फ कोलकाता को बल्कि पूरे बंगाल को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि जब अपराधी राजनीतिक संरक्षण में पल रहे हों, तब क्या वाकई एक आम लड़की को न्याय मिल पाएगा?
इस केस में पुलिस की निष्पक्षता, कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही और सरकार की संवेदनशीलता की असली परीक्षा अब शुरू हुई है। क्या पीड़िता को इंसाफ मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
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