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Many devotees fainted during Puri Rath Yatra, sent to hospital by ambulance.
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पुरी रथ यात्रा में कई श्रद्धालु बेहोश, एंबुलेंस से अस्पताल भेजे गए।
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 28 Jun 2025 08:34 AM IST
पुरी, ओडिशा के ऐतिहासिक शहर में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान इस बार श्रद्धा और आस्था के साथ-साथ उमस और गर्मी की परीक्षा भी देखने को मिली। हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, जब महाप्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर मंदिर प्रांगण से निकले।
लेकिन इस भव्य धार्मिक आयोजन के बीच अचानक एक बेचैन कर देने वाला दृश्य सामने आया। अत्यधिक उमस और घुटन भरे माहौल में कई श्रद्धालुओं ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की और कुछ लोग बेहोश होकर गिर पड़े। घबराहट फैलते ही मौके पर मौजूद मेडिकल टीमों ने तुरंत एम्बुलेंस को बुलाया। प्रभावित लोगों को त्वरित प्राथमिक उपचार देकर स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
ओडिशा सरकार के मंत्री मुकेश महालिंग स्वयं मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने स्थिति की निगरानी करते हुए मीडिया से कहा, “अत्यधिक उमस के कारण एक-दो श्रद्धालु बेहोश हुए हैं। हमारी मेडिकल टीमें अलर्ट पर हैं। हमने मंदिर परिसर और रथ मार्ग के आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैं। ग्लूकोज और पानी का भरपूर इंतजाम है।”
सड़क पर फैले भीड़ में यह सवाल भी चर्चा में आया कि रथों की गति क्यों अचानक रोक दी गई। इस पर प्रख्यात सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कहा, “आज रथ यात्रा की शुरुआत हुई, लेकिन रथों को आज के लिए रोक दिया गया है। कल फिर से खींचा जाएगा। हो सकता है कि रथ किसी विशेष भक्त के कारण रुका हो। कई श्रद्धालु पूरी रात यही रुकेंगे और सुबह रथ खींचने की परंपरा फिर से शुरू होगी।”
कुछ श्रद्धालु रथों को रोकने को एक दिव्य संकेत मान रहे थे। भक्तों की मान्यता है कि यदि कोई विशेष कारण हो तो भगवान स्वयं रथ की गति रोकते हैं।
यह रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होती है। इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ को मुख्य मंदिर से बाहर लाकर विशाल रथ पर विराजमान किया जाता है। उनके साथ बलभद्र और सुभद्रा के रथ भी चलते हैं। यह यात्रा मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर तक जाती है, जिसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है।
पुरी की रथ यात्रा न केवल ओडिशा बल्कि देश और दुनिया के कोने-कोने से आए भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है। इस आयोजन की भव्यता इतनी होती है कि इसे देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। पर इस वर्ष की यात्रा में उमस ने श्रद्धालुओं की श्रद्धा की परीक्षा जरूर ले ली।
रथ यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। जगह-जगह पानी के स्टॉल, छाया स्थल और मेडिकल कैंप लगाए गए थे। प्रशासन ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस बार भीड़ 10 लाख के पार जा सकती है, ऐसे में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया।
हालांकि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं ने चिंता बढ़ाई, लेकिन सरकार की तत्परता और स्थानीय सेवाभाव ने स्थिति को संभाल लिया। अब श्रद्धालु अगली सुबह फिर से रथ यात्रा की दूसरी कड़ी में सम्मिलित होने की तैयारी कर रहे हैं, जहां भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर की ओर आगे बढ़ेंगे।
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