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Russia Earthquake And Volcano: Danger increased due to continuous earthquakes, volcanoes and tsunamis in the R
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Russia Earthquake And Volcano: Ring Of Fire में लगातार भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी से बढ़ा खतरा।
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: अभिलाषा पाठक Updated Mon, 04 Aug 2025 05:00 PM IST
रूस में लगातार दूसरे दिन भूंकप आया है। रूस के पूर्वी इलाके में मौजूद कुरिल आईलैंड्स पर गुरुवार सुबह आए इस भूकंप की तीव्रता 6.5 थी। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 10:57 पर दर्ज हुआ। इसकी गहराई महज 10 किलोमीटर थी। इससे पहले बुधवार को कुरिल द्वीपों के पास समुद्र में 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था। जो अब तक दर्ज किए गए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में छठे नंबर पर है। हालांकि, इसमें अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।8.8 तीव्रता के भूकंप के बाद रूस, जापान, चीन और अमेरिका तक सुनामी लहरें पहुंची थीं। रूस में ये लहरें 4 मीटर ऊंची, जबकि अमेरिका में 1 मीटर तक ऊंची थीं।कुरील में कल भी एक 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके अलावा कामचटका में भूकंप के बाद ज्वालामुखी भी फटा।US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, 8.8 तीव्रता वाले मुख्य भूकंप के बाद बीते 16 घंटे में रूस के आसपास 125 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स आए हैं। इनकी तीव्रता 4.4 या उससे अधिक रही है। इनमें से तीन झटके 6.0 से अधिक तीव्रता के रहे, जिनमें सबसे जोरदार झटका 6.9 तीव्रता का था। यह मुख्य भूकंप के करीब 45 मिनट बाद महसूस हुआ।बुधवार को ही सुबह 11 बजे के करीब मुख्य भूकंप के केंद्र से 200 मील दक्षिण-पश्चिम में 6.4 तीव्रता का एक और आफ्टरशॉक आया।कामचटका में भूकंप के बाद ज्वालामुखी भी फटा....बुधवार को आए 8.8 तीव्रता वाले भूकंप के कुछ ही घंटे बाद कामचाटका प्रायद्वीप पर क्लूचेवस्काया सोपका नाम का ज्वालामुखी फटा।पिछले कुछ दिनों से इस ज्वालामुखी में हलचल बढ़ रही थी। रात में इसके क्रेटर से रोशनी निकल रही थी और दिन में यह राख उगल रहा था। बुधवार को इसने करीब 3 किलोमीटर ऊंचाई तक राख का गुबार छोड़ा।19 जुलाई को रूसी विज्ञान अकादमी के वॉल्केनोलॉजी संस्थान ने इस ज्वालामुखी की एक तस्वीर जारी की थी। उसमें क्रेटर के ऊपर एक बादल नजर आ रहा था, जो नीचे से निकल रही लावा की रोशनी से चमक रहा था।रूस में 600 साल से सुप्त ज्वालामुखी फटा....क्या फिर आएगा प्रलय लाने वाला जलजला...
रूस के आपातकालीन प्राधिकरण के अनुसार, इस क्षेत्र में आए अब तक के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक के बाद, पूर्वी कामचटका क्षेत्र में एक ज्वालामुखी 450 वर्ष में पहली बार फटा है।स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के वैश्विक ज्वालामुखी कार्यक्रम ने कहा कि 1550 में अपने अंतिम विस्फोट के बाद से निष्क्रिय क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी से अब राख का एक विशाल गुबार निकला है, जैसा कि रूसी सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया है।
कामचटका के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने टेलीग्राम पर बताया कि राख का गुबार अनुमानित 6,000 मीटर (19,700 फीट) की ऊँचाई तक पहुँच गया था। मंत्रालय ने बताया, "यह गुबार ज्वालामुखी से पूर्व की ओर प्रशांत महासागर की ओर फैल रहा है। इसके रास्ते में कोई आबादी वाला इलाका नहीं है, और आबादी वाले इलाकों में राख गिरने की कोई सूचना नहीं मिली है।" वैज्ञानिकों का मानना है कि रूस के सुदूर पूर्व में आए एक बड़े भूकंप के आने की खतरे की घंटी है। जानकारों के मुताबिक क्रेशेनिनिकोव ज्वालामुखी ने लगभग 1463 के बाद से लावा नहीं उगला है। रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire) प्रशांत महासागर के चारों ओर विस्तृत ज्वालामुखीय और भूकम्पीय श्रृंखला है, इसी कारण इसे रिंग ऑफ फायर नाम दिया गया है| यह विभिन्न विवर्तनिकी (Tectonic) प्लेट किनारों के सहारे फैली हुई श्रृंखला है। यह दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे से लेकर न्यूज़ीलैंड तक 40,000 किलोमीटर (25,000 मील) तक फैला हुआ है। लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं तथा पृथ्वी पर मौजूद सभी सक्रिय ज्वालामुखियों में से 75% इसी क्षेत्र में स्थित हैं, अर्थात् 452 सक्रिय ज्वालामुखी हैं।
कौन-कौन से देश इस इलाके में बसे हैं?
रिंग ऑफ फायर पर बोलीविया, चिली, इक्वाडोर, पेरू, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, मेक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, रूस, जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका के इलाके बसे हैं।रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर में स्थित क्षेत्र है, इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सक्रीय ज्वालामुखी है। यह अक्सर भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। रिंग ऑफ फायर पृथ्वी की लिथोस्फेरिक प्लेट्स की हलचल और टकराव का नतीजा है। लेकिन ये भूकंप दुनिया को क्यों प्रलय के डर से सहमा रहा है। अब 8 से अधिक की तीव्रता वाले भूकंप में कितना नुकसान हो सकता है.भूकंप अमूमन हर दिन आते हैं और इसके दुनिया के किसी न किसी हिस्से में रोजाना झटके लगते ही रहते हैं. दुनियाभर में एक दिन में अमूमन 55 झटके लगते ही हैं. रूस में पूर्वी तट पर आया भूकंप दुनिया का सबसे छठा भीषणतम भूंकप है. इसके नुकसान को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है.
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