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West Bengal Election Results 2026: Did Humayun Kabir and Owaisi Cut into Mamata's Votes—and by How Much?
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West Bengal Election Results 2026: हुमायूं कबीर-ओवैसी काट ले गए ममता के इतने वोट?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 04 May 2026 04:50 PM IST
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। सोमवार दोपहर एक बजे तक सामने आए चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त बढ़त बना ली है। 294 सीटों वाले इस मुकाबले में बीजेपी 184 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस महज 93 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक कहानी बनकर उभरे हैं पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर। कभी टीएमसी का हिस्सा रहे कबीर ने बगावत कर अपनी नई पार्टी “आम जनता उन्नयन पार्टी” यानी एजेयूपी बनाई और सीधे 115 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। शुरुआती रुझानों में उनकी पार्टी भले ही सिर्फ दो सीटों पर आगे दिख रही हो, लेकिन उसका असर कहीं ज्यादा बड़ा नजर आ रहा है।
दरअसल, एजेयूपी की मौजूदगी ने कई सीटों पर टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगा दी है। नाओदा सीट पर सात दौर की मतगणना के बाद हुमायूं कबीर बीजेपी के राणा मंदक से 8212 वोटों से आगे चल रहे हैं। वहीं रेजिनगर सीट पर चौथे राउंड के बाद वे बीजेपी के बापन घोष से 20053 वोटों की मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि कबीर का प्रभाव सिर्फ उनकी सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई इलाकों में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कबीर की बगावत ने टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक—खासतौर पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों—में बड़ा विभाजन पैदा किया है। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता दिख रहा है, जो इन क्षेत्रों में पहले कमजोर मानी जाती थी। यही वजह है कि कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और टीएमसी को नुकसान उठाना पड़ा।
वहीं दूसरी तरफ, इस चुनाव में एक और बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का बंगाल में पूरी तरह सफाया होता नजर आ रहा है। बिहार में मजबूत प्रदर्शन के बाद AIMIM ने पश्चिम बंगाल में 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन शुरुआती रुझानों में पार्टी एक भी सीट पर बढ़त नहीं बना पाई है। वोट प्रतिशत के लिहाज से भी AIMIM को अब तक महज 0.10 फीसदी वोट ही मिले हैं, जो उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, जहां एक तरफ कबीर की नई पार्टी ने टीएमसी के वोट काटे, वहीं AIMIM मतदाताओं को आकर्षित करने में पूरी तरह नाकाम रही। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि बंगाल का मतदाता इस बार अलग-अलग विकल्पों को आजमाने के बजाय मुख्य मुकाबले में ही अपना रुख तय करता नजर आया।
हालांकि, यह सिर्फ शुरुआती रुझान हैं और मतगणना अभी जारी है। अंतिम नतीजों में बदलाव की पूरी संभावना बनी हुई है। लेकिन फिलहाल जो तस्वीर सामने आ रही है, वह बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है जहां एक तरफ बीजेपी ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है, वहीं टीएमसी के सामने अपनी पकड़ बचाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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