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Bashir Ahmed from Bandipora is breathing new life into Kashmir's legacy of Rabab making.
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Kashmir: बांदीपोरा के बशीर अहमद, रबाब निर्माण की कश्मीर की विरासत को दे रहे नया जीवन
बांदीपोरा के सदनूर गांव के 50 वर्षीय बशीर अहमद पारंपरिक रबाब निर्माण की कला को जीवित रखे हुए हैं और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए समर्पित हैं। वे कश्मीर की इस सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे यह प्राचीन शिल्प परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।
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