भिंड जिले के मेहगांव में आयोजित संकल्प से समाधान शिविर में एक नया विवाद सामने आया है। कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, तो जिला प्रशासन ने उनके बेटे आलोक शुक्ला को ही मुख्य अतिथि बनाकर मंच पर बैठा दिया। जबकि, आलोक शुक्ला किसी भी निर्वाचित पद पर नहीं हैं, फिर भी उन्होंने हितग्राहियों को योजनाओं के प्रमाण-पत्र बांटे। इतना ही नहीं, जनसंपर्क विभाग की प्रेस विज्ञिप्त में उन्हें ‘जनप्रतिनिधि’ बताया गया। इस पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कोई भी हो सकता है जनप्रतिनिधि
मामले में अधिकारियों का कहना है कि जनप्रतिनिधि कोई भी हो सकता है, जबकि, कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन मंत्री के बेटे की सियासी लांचिंग कर रहा है। इस पूरे विवाद और सरकारी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की कुर्सी पर बैठने को लेकर आलोक शुक्ला ने इसे एक सामान्य स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के कारण उनके पिता मंत्री राकेश शुक्ला कार्यक्रम में नहीं आ सके, इसलिए उन्हें आना पड़ा।
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मंत्री को खुश करने में लगे अधिकारी : कांग्रेस
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस का कहना है कि मंत्री बेटे को मुख्य अतिथि बनाकर स्थानीय प्रशासन के अधिकारी कार्यक्रम की परंपरा और नियम तोड़ रहे हैं। सभी मंत्री को खुश करने में लगे हैं। मंत्री शुक्ला की अनुपस्थिति में कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने उनके पुत्र आलोक शुक्ला को मंच पर आमंत्रित किया और उनके हाथों से विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र वितरित कराए। बिना किसी निर्वाचित पद या औपचारिक प्रशासनिक जिम्मेदारी के किसी व्यक्ति को इस प्रकार की भूमिका देना क्या उचित है?