जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंधा गांव से एक सप्ताह पहले लापता हुए दो मासूम चचेरे भाइयों के शव गुरुवार को 8 किलोमीटर दूर पराना तालाब की घटिया के पास जंगल में क्षत-विक्षत हालत में मिले। एक बच्चे का शव लगभग सुरक्षित अवस्था में है, जबकि दूसरे का सिर्फ कंकाल ही बरामद हुआ है। परिजनों ने शवों की पहचान कपड़ों के आधार पर की। फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ऐसे हुआ बच्चों के लापता होने का खुलासा
बंधा गांव निवासी चार वर्षीय देवांश पिता किशन आदिवासी और नमन पिता मिलन आदिवासी 14 मई की दोपहर अचानक लापता हो गए थे। दोनों बच्चे रिश्ते में चचेरे भाई थे और आखिरी बार उन्हें गांव के पास जामुन के पेड़ के नीचे खेलते देखा गया था। शाम तक जब बच्चों का कोई पता नहीं चला, तो परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बच्चों के दादा बेनी आदिवासी ने बताया था कि दोनों बच्चे सुबह से उनके घर पर थे और करीब 10 बजे खेलने के लिए निकले थे। इसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं चला। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर सघन तलाश शुरू की। आसपास के जंगल, कुएं, तालाब और नदी तक की तलाशी ली गई, लेकिन बच्चे नहीं मिले। इस मामले में जब लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला तो सागर रेंज के डीआईजी सुनील कुमार जैन, दमोह एसपी और अन्य अधिकारी गांव पहुंचे। डीआईजी ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि बच्चों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
पढ़ें: गल्ला व्यवसायी की दुकान में 15 लाख की लूट, वारदात सीसीटीवी में कैद; पुलिस जांच में जुटी
जंगल में मिले शव, कई सवाल अनसुलझे
गुरुवार को पराना तालाब के समीप जंगली इलाके में दो बच्चों के शव होने की सूचना परिजनों और पुलिस को मिली। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घटनास्थल पर नमन का शव लगभग सुरक्षित अवस्था में मिला, जबकि देवांश का सिर्फ कंकाल बरामद हुआ है। कंकाल के पास सिर की खोपड़ी और पैर की हड्डियां पड़ी थीं। शवों को देखकर यह कहना मुश्किल है कि यह हत्या है या कोई दुर्घटना। बच्चों की उम्र महज चार वर्ष थी और वे कभी गांव से दूर नहीं गए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि वे 8 किलोमीटर दूर जंगल तक कैसे पहुंचे। यदि जंगली जानवरों ने हमला किया होता, तो दोनों शवों को एक जैसा नुकसान होना चाहिए था, लेकिन एक शव सुरक्षित है और दूसरा पूरी तरह खाया हुआ यह भी जांच का विषय है।
क्या जंगल में किसी के साथ पहुंचे थे मासूम?
पुलिस को शक है कि बच्चे अपने आप इतने दूर जंगल तक नहीं जा सकते। तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी नीतेश जैन ने बताया कि परिजन भी बच्चों की तलाश कर रहे थे और उन्हें ही सबसे पहले जंगल में शव नजर आए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि बच्चे जंगल में अपने आप पहुंचे या किसी के साथ आए। फिलहाल सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि देवांश के शव की स्थिति को देखते हुए उसका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, ताकि पूरी तरह से पहचान की पुष्टि की जा सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पुलिस दोनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का सही खुलासा हो सकेगा। फिलहाल गांव में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं। तेंदूखेड़ा पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह पता लगाया जाए कि बच्चों की मौत कैसे हुई और वे जंगल तक कैसे पहुंचे।