दमोह जिले में गुरुवार को मानसून ने जोरदार दस्तक देते हुए जमकर बारिश कराई। दोपहर बाद शुरू हुई तेज बारिश से जहां मौसम पूरी तरह बदल गया और लोगों को भीषण गर्मी व उमस से राहत मिली, वहीं तेंदूखेड़ा क्षेत्र में हालात सबसे अधिक प्रभावित हुए। लगातार बारिश के कारण ब्यारमा नदी उफान पर आ गई, जिससे जैतगढ़ (जेतपुर) के पास बनी पुलिया पानी में डूब गई और तेंदूखेड़ा-तारादेही मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। दूसरी ओर झापन घाट पुल पर भी तेज बहाव के चलते यातायात रोक दिया गया है। इससे लोगों को करीब 26 किलोमीटर का लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
गुरुवार दोपहर करीब एक बजे से तेंदूखेड़ा ब्लॉक में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। लगातार हो रही बारिश से ब्यारमा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और जैतगढ़ के समीप बनी पुलिया पूरी तरह पानी में डूब गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिया से वाहनों की आवाजाही रोक दी। इसके चलते तेंदूखेड़ा से तारादेही जाने वाला मुख्य मार्ग बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री घंटों तक रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे।
ये भी पढ़ें- सोन नदी में नहाने उतरा किशोर डूबा, दोस्तों के सामने गई जान
बारिश थमने के बाद भी 4 से 5 घंटे तक इंतजार करना पड़ेगा
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि बारिश तत्काल बंद भी हो जाए तो पुलिया से पानी उतरने में कम से कम चार से पांच घंटे का समय लग सकता है। जब तक जलस्तर सामान्य नहीं होगा, तब तक आवागमन शुरू नहीं किया जाएगा। ऐसे में यात्रियों और ग्रामीणों को मजबूरी में वहीं रुकना पड़ रहा है।
झापन घाट पुल बंद, अब 26 किलोमीटर का वैकल्पिक रास्ता
बारिश का असर झापन घाट क्षेत्र में भी देखने को मिला। तेज बहाव के कारण झापन घाट पुल को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल पर पानी की धार इतनी तेज है कि किसी भी प्रकार की आवाजाही जोखिम भरी मानी जा रही है। इसके चलते वाहन चालकों को हरदुआ, इमलिया, लकलका, सोमखेड़ा होते हुए झापन पहुंचना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग से करीब 26 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे यात्रियों का समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च हो रहे हैं।
हर साल बारिश में डूब जाती हैं, छोटी पुलियाएं
तेंदूखेड़ा क्षेत्र में मानसून के दौरान ऐसी स्थिति हर वर्ष बनती है। यहां कई छोटी पुलियाएं बनी हुई हैं, जो दो से तीन घंटे की तेज बारिश में ही पानी के नीचे चली जाती हैं। इससे पुलिया के दोनों ओर बसे कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ग्रामीण लंबे समय से ऊंचे पुलों के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
ये भी पढ़ें- अत्याचार: महिला के साथ शर्मनाक हरकत, बाल काटे-कपड़े फाड़े और जी नहीं भरा तो जूते की माला पहनाकर घुमाया
दमोह शहर में भी झमाझम बारिश, मौसम हुआ सुहावना
तेंदूखेड़ा के अलावा दमोह शहर में भी दोपहर से लगातार झमाझम बारिश हो रही है। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी व उमस से राहत मिली। शहर में फिलहाल किसी बड़े जलभराव या जनजीवन प्रभावित होने की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार बारिश जारी रहने पर निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका बनी हुई है।
जुलाई की शुरुआत में मेहरबान हुआ मानसून
इस वर्ष जून का पूरा महीना लगभग सूखा बीता। बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे और लोगों को तेज गर्मी तथा उमस का सामना करना पड़ा। जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून सक्रिय होने पर जिले में राहत की बारिश हुई है। तेंदूखेड़ा के अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों में भी रिमझिम से लेकर मध्यम बारिश दर्ज की गई।
किसानों में खुशी, अब खेतों में शुरू होगी बोनी
लगातार बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनने लगी है। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और अब खरीफ फसलों की बोनी का कार्य तेज होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह बारिश होती रही तो जिले में खेती-किसानी की गतिविधियां पूरी रफ्तार पकड़ लेंगी। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि उफनती नदियों और पानी से डूबी पुल-पुलियाओं को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

पुल से बहते पानी के उतरने का इंतजार करते राहगीर
पुल से बहते पानी के उतरने का इंतजार करते राहगीर
पुल से बहते पानी के उतरने का इंतजार करते राहगीर