पानी में डूबोगे तो मृत्यु निश्चित है और भक्ति में डूबे रहोगे तो मोक्ष की प्राप्ति होगी। बाहर से भले ही संसारी बनो, लेकिन मन के भीतर हमेशा संन्यासी बने रहो, ताकि जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सको। भगवान के प्रति प्रीत दिल से लगाओ और दिमाग लगाओ तो अपने काम में लगाओ, जिससे कार्य भी सरल हो जाएं। यह विचार कथा व प्रवचन के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने व्यक्त किए।
पं. शास्त्री ने “सरल” शब्द का अर्थ समझाते हुए कहा कि हृदय में सरलता होनी चाहिए, तभी उसमें प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का वास होता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में धर्मांतरण ने पैर पसारने की कोशिश की है, लेकिन उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। हमें भारत की परंपरा पर गर्व है। हम दिखने में भले अलग हों, लेकिन सभी हिंदू एक हैं। जैन समाज के संबंध में उन्होंने कहा कि हिंदू और जैन एक ही हैं। जैन परंपरा सनातन धर्म से अलग नहीं है। उन्होंने बताया कि वे पालीताना तीर्थ होकर भी आए हैं, जहां जैन समाज की भगवान आदिनाथ के प्रति अटूट आस्था है।
ये भी पढ़ें- अंधविश्वास ने ली जान: बेटे के दोस्त ने कुल्हाड़ी से काटा महिला का गला, हैरान कर देगी खौफनाक हत्याकांड की वजह
दरअसल, धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम राजगढ़ स्थित मोहनखेड़ा जैन तीर्थ की पावन भूमि पर सोमवार को आस्था का महाकुंभ देखने को मिला। कथा व प्रवचन सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। हर कोई बागेश्वर सरकार की एक झलक पाने को उत्सुक दिखाई दिया। पं. शास्त्री शाम करीब 4 बजे कथा स्थल पहुंचे। इससे पूर्व उन्होंने मोहनखेड़ा तीर्थ में भगवान आदिनाथ एवं दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वर जी मसा के दर्शन-वंदन किए और साधु-साध्वियों से भेंट की। श्री मोहनखेड़ा जैन तीर्थ ट्रस्ट मंडल द्वारा उनका सम्मान किया गया। जैसे ही पं. शास्त्री मंदिर परिसर से बाहर आए, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वे खुली जीप में श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए कथा स्थल पहुंचे, जहां आतिशबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
देरी से पहुंचने पर मांगी माफी
बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री लगभग एक घंटे तक कथा स्थल पर रहे। उन्होंने देरी से पहुंचने पर माफी मांगते हुए कहा कि “मेरा उड़न खटोला उड़ नहीं पाया, इसलिए देर हो गई, लेकिन मैं मोहनखेड़ा आता-जाता रहूंगा।” उन्होंने सरदारपुर के दादा दयालु मंदिर का भी उल्लेख किया। मंच पर रमेश गोवाणी परिवार द्वारा पं. शास्त्री का अभिनंदन किया गया। प्रसिद्ध भजन गायक अमित धुर्वे ने भजनों की प्रस्तुति दी, वहीं कॉमेडियन सुनील पाल ने लोगों को हंसाया। मंच पर हनुमानगढ़ी अयोध्या के राजूदास जी महाराज सहित अनेक संत और क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल भी उपस्थित रहे।
ये भी पढ़ें- एसआई ने एसपी की कर दी शिकायत, लगाया गाली-गलौज-मानसिक प्रताड़ना और झूठी जांच का आरोप
रामधुन से हुई शुरुआत
बागेश्वर सरकार की कथा सुनने के लिए अनेक जिलों से श्रद्धालु मोहनखेड़ा पहुंचे थे, जिनके भोजन की व्यवस्था लाभार्थी परिवारों द्वारा की गई। जैसे ही पं. शास्त्री कथा स्थल पहुंचे, जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा। प्रवचन की शुरुआत रामधुन से की गई, जिससे वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया। अंत में अर्जी लगाकर कथा का समापन किया गया। कथा को एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी प्रसारित किया गया। ग्राम पिपरनी के प्रीतम और मोहनखेड़ा की खुशी मिश्रा ने पं. शास्त्री को स्केच पेंटिंग भेंट की।
जैन और हिंदू एक ही
मीडिया से बातचीत में पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जैन धर्म और हिंदू धर्म एक ही हैं। मोहनखेड़ा तीर्थ में आदिनाथ ऋषभदेव जी और दादा दयालु हनुमान जी के दर्शन किए। यह क्षेत्र सनातन परंपरा और गौसेवा की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने 15 फरवरी को कन्या विवाह कार्यक्रम का आमंत्रण भी दिया और कहा कि सनातनी आपस में न लड़ें, एकजुट रहें। संत समाज और सनातनी समाज की एकता जरूरी है।
विशाल पंडाल और सुरक्षा व्यवस्था
मोहनखेड़ा तीर्थ स्थित 108 धर्मशाला के समीप आयोजित कथा के लिए हजारों वर्गफुट में विशाल पंडाल बनाया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 8 एलईडी स्क्रीन और सुरक्षा की दृष्टि से 50 से अधिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। आयोजन के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।

धार पहुंचे बाबा बागेश्वर
आयोजन में उपस्थित जनसमुदाय