मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आज नाथूराम गोडसे की 116वीं जयंती मनाई गई। दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा कार्यालय पर महाआरती का आयोजन हुआ। महासभा ने चल समारोह की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस अलर्ट मोड पर रही और कार्यालय के बाहर तैनात रही। इस दौरान हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने विवादित बयान भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वह देश भर में नाथूराम गोडसे की मूर्तियों को स्थापित करेंगे।
19 मई को ग्वालियर के दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा कार्यालय में नाथूराम गोडसे की 116वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। महासभा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गोडसे की तस्वीर पर माल्यार्पण कर महाआरती की। संगठन ने इस मौके पर शहर में चल समारोह निकालने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी। लेकिन कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। अनुमति न मिलने के बाद हिंदू महासभा ने कार्यालय परिसर में ही कार्यक्रम किया।
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इस दौरान महासभा के कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नाथूराम गोडसे गांधी जी के हत्यारे नहीं थे, बल्कि उन्होंने वध किया था। उनकी नीतियां पाकिस्तान परस्त और मुस्लिम परस्त थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया। इस बयान के बाद मौके पर माहौल संवेदनशील हो गया। कार्यक्रम और बयानों को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर थी। दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी ताकि शहर का माहौल खराब न हो।गौरतलब है कि ग्वालियर में पहले भी गोडसे से जुड़े कार्यक्रमों पर विवाद होता रहा है।