केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दो दिवसीय निरीक्षण दौरे पर हैं, जिसके तहत वे 1386 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। गुरुवार को जब गडकरी का काफिला दिल्ली की ओर से मध्यप्रदेश में प्रवेश करता हुआ झाबुआ जिले की सीमा से गुजरा, तो पूरे मार्ग पर प्रशासनिक सक्रियता अपने चरम पर थी। मंत्री के आगमन की आहट मिलते ही एक्सप्रेसवे का प्रबंधन हरकत में आया और आनन-फानन में सड़कों की सफाई के साथ-साथ खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया। दौरे से ठीक पहले की गई इस सक्रियता ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि इस मार्ग पर बाइक, तीन पहिया टेंपो और ट्रैक्टरों प्रतिबंधित हैं, लेकिन रोजाना इनका बेरोकटोक आवागमन रहता है और मवेशी घूमते नजर आते हैं। लेकिन मंत्री के गुजरने से पहले वहां परिंदा भी पर नहीं मार सका और सभी प्रतिबंधित वाहन गायब रहे। वहीं, दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर एक्सप्रेसवे पर पहुंचे युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को मंत्री से मिलने का मौका नहीं मिला। युवक कांग्रेस ने जब अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया, तो बीच रास्ते में ही एडिशनल एसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया ने उनसे ज्ञापन ले लिया। कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से इथेनॉल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए देर रात एक्सप्रेसवे पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
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मंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह था और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता खजुरी में स्वागत के लिए घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। दरअसल, कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्री थांदला और मेघनगर होते हुए जाएंगे, लेकिन उनका काफिला टीमरवानी से सीधे गुजरात की ओर निकल गया। फिलहाल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा आम जनता के लिए पूरी तरह से नहीं खुला है, लेकिन मंत्री के इस तूफानी निरीक्षण दौरे ने प्रोजेक्ट के जल्द पूर्ण होने की उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है। हालांकि ये तो आना वाला समय ही बताएगा कि ये प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा और लोगों को कब तक पूर्ण रूप से दिल्ली-मुंबई के बीच एक बेहतर सड़क सुविधा मिल पाएगी।