केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी के विरोध में शहर में सर्व समाज के बैनर तले रैली निकाली गई। रैली में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं सहित एक हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को काला कानून बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की और सरकार को चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आगामी चुनावों में भाजपा के स्थान पर नोटा को चुनने के लिए मजबूर होंगे।
रैली राधा वल्लभ मार्केट से शुरू हुई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए पुराना कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां तहसीलदार दिनेश सोनरतिया को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में यूजीसी कानून को समाज में भेदभाव पैदा करने वाला बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई।
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सर्व समाज के प्रतिनिधि राजू शर्मा ने कहा कि देश में जात-पात की विदाई के नाम पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह के कानून लाकर समाज के वर्गों में विभाजन पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को गो हत्या, धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर सख्त कानून बनाने चाहिए थे, न कि ऐसा कानून जो समाज को तोड़ने का काम करे। यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया तो सर्व समाज कांग्रेस में नहीं जाएगा, लेकिन भाजपा को वोट देने की बजाय नोटा का विकल्प चुनेगा।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आशंका जताई कि इस कानून से विशेष रूप से सवर्ण समाज के विद्यार्थियों पर बेवजह की कार्रवाई की जा सकती है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। इस मौके पर ममता जितेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा कि एससी-एसटी और यूजीसी जैसे कानूनों के चलते देश में सवर्ण समाज के लिए स्थिति कठिन होती जा रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि देश में सवर्ण समाज की स्थिति बांग्लादेश में हिंदुओं जैसी हो जाए।