अलवर की कटी घाटी स्थित अरावली पर्वतमाला की तलहटी में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गुरुवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। इससे पहले जूली के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अरावली क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया और पर्वतमाला को बचाने के समर्थन में नारेबाजी की।
अरावली क्षेत्र में कथित अवैध खनन को लेकर जूली ने इसे पर्यावरण, कानून और जनहित के साथ खुला खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि एक ही पहाड़ का एक हिस्सा संरक्षित क्षेत्र में आता है, जबकि उससे सटे दूसरे हिस्से में खुलेआम खनन किया जा रहा है। यह सरकार की दोहरी नीति को उजागर करता है।
टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। अरावली जंगलों, जलस्तर, वन्यजीवों और स्थानीय लोगों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसके बावजूद सरकारें राजस्व के नाम पर इस प्राकृतिक धरोहर को नष्ट करने पर तुली हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संरक्षित क्षेत्र की आड़ में कुछ हिस्सों को बचाया जा रहा है, जबकि अन्य पहाड़ियों को जानबूझकर खनन के लिए खोल दिया गया है।
जूली ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वयं अलवर से सांसद हैं और अरावली की संवेदनशीलता से भली-भांति परिचित हैं। ऐसे में उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में “अरावली माता” को नुकसान पहुंचाने वाले फैसले लिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विकास के नाम पर पर्यावरण की बलि देना ही एकमात्र विकल्प रह गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अरावली पर्वतमाला में खनन पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। इसके बावजूद सरकार नए नियमों और आदेशों के जरिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। जूली का दावा है कि इन प्रावधानों के चलते अरावली क्षेत्र की करीब 90 प्रतिशत पहाड़ियां खनन के दायरे में आ सकती हैं, जो भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट को जन्म देगा।
ये भी पढ़ें- Rajasthan News: पुष्कर के किशनपुरा मोड़ पर निजी बस पलटी, 20 से अधिक यात्री घायल; पांच की हालत गंभीर इलाज जारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जूली ने कहा कि अवैध खनन से पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में है। इसके कारण जल स्रोत सूख रहे हैं, भूजल स्तर गिर रहा है और तापमान में असामान्य वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर किसानों, पशुपालकों और आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते अरावली को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
जूली ने राज्य सरकार पर खनन माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए अरावली क्षेत्र में हो रहे सभी प्रकार के खनन की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अरावली पर्वतमाला को पूरी तरह संरक्षित घोषित करने की अपील की।