अलवर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशिष्ट न्यायालय पॉक्सो संख्या-1 ने आरोपी राममुरारी उर्फ लाला को दोषी ठहराया। साथ ही उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला न्यायाधीश जगेन्द्र अग्रवाल ने सुनाया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा दी।
वर्ष 2024 में दर्ज हुआ था मामला
विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा के अनुसार, यह मामला 27 जून 2024 को थाना बगड़ तिराहा में दर्ज हुआ था। पीड़िता की मां ने रिपोर्ट में बताया कि उनके घर पर परचूनी की दुकान है, जहां उनकी बेटी अक्सर अकेले बैठती थी।
सामान लेने के बहाने बढ़ाया संपर्क
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी राममुरारी और उसका साथी वकील सामान लेने के बहाने दुकान पर आते-जाते थे और धीरे-धीरे नाबालिग से संपर्क बढ़ाने लगे। आरोप है कि इसी दौरान पीड़िता को बहलाकर उससे अपराध किया गया।
नशीला पदार्थ पिलाने और धमकाने का आरोप
मामले में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने पेप्सी में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़िता को पिलाया, जिससे वह बेसुध हो गई। होश आने पर पीड़िता ने खुद को असहाय स्थिति में पाया। इसके बाद अश्लील वीडियो बनाकर उसे डराने-धमकाने और कई बार शोषण करने के आरोप भी सामने आए।
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नकदी और जेवरात लेने का भी आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, भय के कारण पीड़िता घर से नकदी भी आरोपियों को देने लगी। घटना के बाद 24 जून 2024 को एक बार फिर नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किए जाने और पीड़िता के सोने के जेवरात ले जाने का भी आरोप लगाया गया।
अदालत में पेश हुए गवाह और दस्तावेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाह और 24 दस्तावेज प्रस्तुत किए। अदालत ने इन्हें महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अपराध समाज के लिए घातक हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। इसी आधार पर आरोपी को सजा सुनाई गई।