अलवर जिले के सामान्य चिकित्सालय में सोमवार और गुरुवार को बनाए जाने वाले दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केवल दो दिन प्रमाण पत्र बनाए जाने के कारण विकलांगजन और उनके परिजन सुबह से ही लाइन में लग जाते हैं। टोकन नंबर लेने पर ही समय पर नंबर आता है। वहीं, अगर दस्तावेजों में कोई कमी होती है, तो उन्हें फिर से चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है।
प्रमाण पत्र बनाने के लिए चार डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया में अधिक समय लगने के कारण दिव्यांगों को काफी दिक्कत होती है। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ दिव्यांगजन जमीन पर बैठकर इंतजार करते हैं।
सोनावा निवासी दिव्यांग बालिका सुधा नरूका की मां ने बताया कि उनकी बेटा का ऑफलाइन प्रमाण पत्र पहले से बना है। लेकिन, ऑनलाइन प्रमाण पत्र के लिए उन्हें सुबह 8 बजे अस्पताल आना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, 60 फीट रोड निवासी बुजुर्ग ऋषि लाल का कहना है कि प्रक्रिया लंबी होने और लोगों की अत्यधिक भीड़ के कारण यह समस्या हो रही है।
दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के लिए केवल दो दिन तय किए गए हैं, जिससे इन दो दिनों में ही सभी को प्रमाण पत्र बनवाने पड़ते हैं। इसी वजह से अधिक भीड़ और अव्यवस्था हो रही है। कई बार लोगों को चार-चार बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर भी उनके प्रमाण पत्र मुश्किल से बन पाते हैं। प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण दिव्यांगजनों को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।