बाड़मेर जिले को एनीमिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, रेफ ग्लोबल और एल्केम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में विभिन्न विभागों, विशेषज्ञों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने मिलकर गहन मंथन किया। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी बच्चा, किशोर-किशोरी या गर्भवती महिला खून की कमी से प्रभावित न रहे।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णु राम विश्नोई ने अभियान के लक्ष्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों के साथ रेफ ग्लोबल और एल्केम फाउंडेशन को समन्वय से कार्य करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स की उपलब्धता और जागरूकता से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
शिक्षाविद डॉ. बंशीधर तातेड ने बदलते खान-पान को एनीमिया का प्रमुख कारण बताते हुए पोष्टिक, मौसमी सब्जियां और फल खाने की सलाह दी। उन्होंने फास्ट फूड, चिप्स, कुरकुरे जैसे जंक फूड से बच्चों को दूर रखने और देशी पारंपरिक भोजन पर जोर देने की बात कही। डॉ. तातेड ने सामुदायिक स्वास्थ्य सुधार के लिए विभागों और संगठनों के सहयोग तथा स्वयं से शुरू होने वाली जागरूकता पर बल दिया।
रेफ ग्लोबल की एरिया मैनेजर (जैसलमेर - बाड़मेर) करिश्मा भाटी तंवर ने कार्यक्रम के उद्देश्य और अब तक की प्रगति साझा की। उन्होंने बताया कि रेफ ग्लोबल विश्व के 7 देशों में कार्यरत है और पश्चिमी राजस्थान में खासकर जैसलमेर व बाड़मेर में एनीमिया मुक्त अभियान चला रहा है। वर्ष 2024 से शुरू इस प्रयास में ढाई हजार लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें अब मात्र 9 व्यक्ति ही एनीमिया से ग्रस्त बचे हैं जो कि अपने आप यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि हमने बाड़मेर और बालोतरा जिले के 10-10 गांवों को चिन्हित कर काम शुरू किया है और जल्द पूरे जिले को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक प्रहलाद सिंह राजपुरोहित ने पंचायत स्तर पर स्क्रीनिंग, हीमोग्लोबिन परीक्षण की चुनौतियों और आंगनवाड़ी केंद्रों, पोषण अभियान तथा आईसीडीएस की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त बाड़मेर हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. पंकज कुमार ने पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल और पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने मातृ एवं शिशु पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, जांच, निदान और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता पर बल दिया। इसके साथ ही प्रजनन और बाल स्वास्थ्य अधिकारी बाकाराम, अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक दीपाराम चौधरी, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी महिपाल सिंह, डीपीएम सचिन भार्गव व राकेश भाटी द्वारा एनीमिया पर विस्तार से अपनी बात रखी।
क्षेत्रीय प्रमुख तापस सतपथी ने सभी विभागों से सामंजस्य स्थापित कर आमजन को खून की कमी के कारणों से जागरूक करने, बच्चों व गर्भवती महिलाओं को आयरन गोलियां वितरित करने, शाला दर्पण एवं पीसीटीएस में रिपोर्टिंग तथा मासिक बैठकें आयोजित करने पर जोर दिया। जिला समन्वयक सोनाराम चौधरी ने विभिन्न विभागों, सीएसआर और संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भागीदारी की जानकारी दी।