राजस्थान के थार क्षेत्र में वर्षा जल संग्रहण के पारंपरिक और जीवनदायी साधन ‘टांके’ अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गए हैं। बायतु विधायक एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने राज्य सरकार द्वारा टांकों को नरेगा कार्यों से हटाने के आदेश को ‘क्रूर, जनविरोधी और अस्वीकार्य’ करार दिया है। उन्होंने इसे थार की संस्कृति, मेहनत और जल प्रबंधन पर सीधा आघात बताया।
‘थार की आत्मा पर कुठाराघात’
हरीश चौधरी ने कहा कि टांके केवल संरचनाएं नहीं, बल्कि थार के अस्तित्व का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस पारंपरिक जल संग्रहण प्रणाली ने रेगिस्तान के लोगों को पानी की किल्लत से राहत दी, उसे नरेगा कार्यों से बाहर करना एक अमानवीय निर्णय है। चौधरी ने कहा कि दीवाली के दिन जब सरकार को थार के लोगों को सम्मान देना चाहिए था, तब उसे दंड दिया जा रहा है। यह थार की मेहनतकश जनता और उनके नवाचार का अपमान है। उन्होंने इस फैसले को न केवल प्रशासनिक भूल, बल्कि थार की परंपरा और पर्यावरण के खिलाफ कदम बताया।
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‘टांके ही हैं थार का इजराइल मॉडल’
चौधरी ने कहा कि सरकार जिस वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल को त्रुटिपूर्ण बता रही है, वही थार के जीवन का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिस इज़राइल मॉडल की चर्चा करती है, उससे कहीं अधिक व्यवहारिक और प्रभावी मॉडल हमारे थार के टांके हैं। उन्होंने बताया कि इन टांकों ने 3.5 लाख से अधिक परिवारों को पानी की समस्या से मुक्ति दी है और नरेगा के माध्यम से इनका निर्माण एक सफल जनभागीदारी अभियान रहा है। यह टांके केवल पीने के पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि पशुधन, कृषि और पारिस्थितिक संतुलन का भी आधार हैं।
‘जनविरोधी आदेश वापस लो, नहीं तो आंदोलन होगा’
हरीश चौधरी ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि जीवन और अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि थारवासी इस निर्णय को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। यदि सरकार ने इसे रद्द नहीं किया, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।
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