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Bhilwara News: Students protest in biting cold to stop teacher’s transfer, camping outside school all night
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Bhilwara News: कड़कड़ाती ठंड में शिक्षक का ट्रांसफर रुकवाने धरने पर बैठे बच्चे, रातभर स्कूल के बाहर डाला डेरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो Updated Tue, 13 Jan 2026 07:16 PM IST
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जिले के कोटड़ी ब्लॉक के नंदराय कस्बे में शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा की एक भावुक मिसाल देखने को मिली। राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय, नंदराय में भूगोल के लेक्चरर शंकरलाल जाट के ट्रांसफर के विरोध में छात्र-छात्राएं कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठ गए। सोमवार शाम शुरू हुआ यह आंदोलन मंगलवार सुबह तक जारी रहा, जबकि तापमान 8 डिग्री के आसपास था।
जानकारी के अनुसार 11 जनवरी को शंकरलाल जाट का तबादला आदेश जारी हुआ। जैसे ही यह खबर छात्रों तक पहुंची, उनमें आक्रोश फैल गया। सोमवार शाम लगभग 4 बजे छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। घंटों गुजर जाने के बाद भी जब कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा, तो बच्चों ने स्कूल गेट के बाहर ही खाना खाया और वहीं टेंट लगाकर रात बिताई।
सर्द हवाओं, ठिठुरन और अंधेरी रात के बीच बच्चों का यह संकल्प बेहद मार्मिक दृश्य था। आंदोलन की सूचना मिलते ही ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी बच्चों का साथ दिया। किसी ने भोजन की व्यवस्था की तो किसी ने कंबल और बिस्तर पहुंचाए। यह दृश्य न सिर्फ विरोध का, बल्कि सामूहिक संवेदना और एकजुटता का प्रतीक बन गया।
मंगलवार सुबह भी धरना जारी रहा। स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 600 विद्यार्थियों में से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौके पर पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। स्कूल पर ताला लगा रहा और बच्चे बाहर बैठकर नारेबाजी करते रहे। नाश्ता और दोपहर का भोजन भी स्कूल परिसर के बाहर ही किया गया, लेकिन किसी ने कदम पीछे नहीं खींचा।
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि वे सोमवार से शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, मगर अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जब तक शंकरलाल जाट का ट्रांसफर निरस्त नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ी तो वे आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
छात्र अनिल अहीर ने बताया कि शंकरलाल जाट सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक जैसे मार्गदर्शक हैं। पिछले सत्र में उन्होंने बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को अपने खर्चे पर हवाई यात्रा करवाई थी। इतना ही नहीं स्कूल भवन की जर्जर स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने भामाशाहों से संपर्क कर मरम्मत कार्य भी करवाया।
पिछले सात वर्षों से नंदराय स्कूल में सेवाएं दे रहे शंकरलाल जाट ने शिक्षा को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में मार्गदर्शक भूमिका निभाई। यही कारण है कि आज छात्र-छात्राएं उनके तबादले को अपने भविष्य से जुड़ा मुद्दा मानकर कड़ाके की ठंड में भी संघर्ष कर रहे हैं।
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