बूंदी: राजस्थान के बूंदी जिले के 800 साल पुराने बरुंधन गांव में मकर संक्रांति पर परंपरागत दड़े का खेल बड़े उत्साह और जोश के साथ खेला गया। यह खेल बरुंधन कस्बे और आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव माना जाता है।
श्याम सिंह हाड़ा ने की खेल की शुरुआत
परंपरा के अनुसार, खेल की शुरुआत से पहले ढोल-नगाड़ों के साथ हाड़ा वंशज श्याम सिंह हाड़ा खेल प्रेमियों के साथ कस्बे के बाहर सुरापान करने पहुंचे। इस दौरान पुराने बुजुर्ग खिलाड़ी भी मौजूद रहे। इसके बाद राजपूत मोहल्ले स्थित अपने निवास पर सभी का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और फिर ग्रामीणों के साथ दड़े को लेकर मुख्य बाजार स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर के सामने खेल स्थल पर पहुंचे। श्याम सिंह हाड़ा ने दड़े की विधिवत पूजा-अर्चना की और खेल की शुरुआत की।
खेल के दौरान खिलाड़ियों पर बरसाए गए फूल
खेल के दौरान युवाओं ने जोश दिखाया। ढोल की थाप पर खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ गया। खेल में धक्का-मुक्की, खींचतान और तू-तू मैं-मैं भी देखने को मिली। दर्शकों से भरी छतों पर महिलाएं और युवतियां खिलाड़ियों पर फूल बरसाती और फब्तियां कसती रहीं। कुछ खिलाड़ियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन उन्होंने उत्साह और खेल भावना के साथ खेल जारी रखा। इस वर्ष के दड़ा महोत्सव में तालेड़ा, सीतापुरा, नावघाट का टापरा, धनातरी, अधेड़, गुमानपुरा, नमाना, भरता बावड़ी, लक्ष्मीपुरा, डोरा, गादेगाल, सांवलपुरा, भवरिया कुआं सहित कई गांवों के लोग शामिल हुए।
दड़े की परंपरा
बरुंधन गांव की बसावट लगभग संवत 1252 में हुई थी। गांव में हाड़ा परिवार के करीब 60 परिवार रहते थे। उन्होंने यह खेल जोर आजमाइश और सामाजिक मेलजोल के लिए शुरू किया। दड़े को टाट, सूत और रस्सी की मदद से 35-40 किलो वजन का बनाया जाता है। खेल में दो दल होते हैं एक हाड़ा परिवार और दूसरा आसपास के गांवों के लोगों का। खेल से पहले सुराप्रेमी खिलाड़ियों को सुरापान करवाया जाता है और ढोल की थाप खिलाड़ियों में उत्साह भर देती है।
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दड़े की खासियत
बरुंधन में यह परंपरा रियासतकाल से आज तक लगातार चली आ रही है। खेल में गोलपोस्ट, गोलकीपर या रेफरी नहीं होते, फिर भी किसी प्रकार का भेदभाव या शिकायत नहीं होती। खेल के दौरान यदि कोई खिलाड़ी गिर जाता है, तो खेल रोककर उसे उठाया जाता है और फिर खेल शुरू किया जाता है। दोनों टीमें पैरों से दड़े को एक-दूसरे की तरफ धकेलने का प्रयास करती हैं और यही खेल का मुख्य नियम है।