पश्चिमी राजस्थान के पावन तपोभूमि बालोतरा जिले के मालाजाल में स्थित ऐतिहासिक श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर के जीर्णोद्धार की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को एक अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में हुई। इस अवसर पर आयोजित शिलान्यास समारोह में सैकड़ों श्रद्धालु, संत-पुरोहित, गणमान्य अतिथि और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल विद्वान पंडितों के नेतृत्व में गणपति पूजन, षोडश मात्रिका पूजन, नवग्रह पूजन, वास्तु पूजन, नवशीला पूजन, यंत्र पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से हुआ। पूरे मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि गूंजती रही, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
मुख्य शिलान्यास श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशज एवं संस्थान अध्यक्ष, 25वें गादीपति रावल किशन सिंह जसोल ने अपने कर कमलों से किया। इस दौरान हवन एवं शीला स्थापना की विशेष विधि सम्पन्न हुई और भगवान श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री रानी रूपादे जी को विशेष भोग अर्पित कर महाप्रसादी का वितरण किया गया।
मंदिर जीर्णोद्धार की विशेष योजना
संस्थान के अनुसार मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य अब आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुका है, जो लगभग एक वर्ष की अवधि में पूर्ण होने की संभावना है। श्रद्धालुओं को नव निर्मित मंदिर के भव्य स्वरूप की झलक पोस्टर एवं प्रोजेक्शन डिस्प्ले के माध्यम से दिखाई गई, जिसमें मंदिर की वास्तुशिल्पीय सुंदरता और पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य शैली को प्रदर्शित किया गया। शिलान्यास के इस अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र एक दिव्य और आध्यात्मिक मेले में बदल गया। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लेकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्ण कुमार विश्नोई, पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह जसोल, बाड़मेर रावत त्रिभुवन सिंह, सिणधरी रावल विक्रम सिंह, कोटड़ा राणा नरेंद्र सिंह, सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल, संस्थान उपाध्यक्ष कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल, पूर्व विधायक शैतान सिंह राठौड़, भामाशाह समुद्रसिंह नौसर, दिलीप सिंह बुड़ीवाड़ा, पृथ्वी सिंह कोलू और पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा शामिल थे।
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मालाजाल का आध्यात्मिक इतिहास
मालाजाल कोई साधारण स्थान नहीं, बल्कि यह वह पावन भूमि है जहां 14वीं शताब्दी में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी और उनकी धर्मपत्नी श्री रानी रूपादे जी ने अपना जीवन व्यतीत किया। यही वह स्थल है जहां एक बार रावल मल्लीनाथ जी ने अपनी दिव्य सिद्धि से जाल की टहनी से तत्काल जाल का वृक्ष उगाया था, जो आज भी यहां विद्यमान है और भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है।यहीं से शुरू हुआ संत समागम कालांतर में श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला – तिलवाड़ा के रूप में विख्यात हुआ, जो आज राजस्थान का सबसे प्राचीन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पशु मेला है। यह मेला चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी से पंद्रह दिन तक आयोजित होता है और इसमें पशु व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहती है।
श्री रावल मल्लीनाथ जी का जीवन परिचय
रावल मल्लीनाथ जी का जन्म महेवा नगर के शासक राव सलखा जी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ। वे केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि मालाणी प्रदेश के संस्थापक, सिद्ध पुरुष, सामाजिक समरसता के प्रतीक और लोक मानस में ‘मालाणी के महादेव’ और ‘त्राता’ (रक्षक) के रूप में पूजनीय हैं। इस जीर्णोद्धार परियोजना के माध्यम से न केवल मंदिर के प्राचीन वैभव को पुनः स्थापित किया जाएगा, बल्कि मालाजाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जाएगा। यह कदम क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने और यहां की धार्मिक पर्यटन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।