क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर निकाली जा रही संवैधानिक अधिकार जागरूकता पदयात्रा बुधवार को जोधपुर पहुंची। यह पदयात्रा 14 तारीख को बाखासर बॉर्डर से शुरू की गई थी। जोधपुर पहुंचने पर पदयात्रा सेंट्रल जेल के बाहर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स पर रुकी, जहां प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग की।
'संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निकाली गई पदयात्रा'
पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय मूल निवासी संघ एवं भारतीय भील सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष तारा राम मेहना ने कहा कि यह पदयात्रा न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निकाली गई है। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक को केवल संवैधानिक अधिकारों की मांग करने के कारण लद्दाख से गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल, जोधपुर लाया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।
बीच रास्ते में वांगचुक को किया गया था गिरफ्तार
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का 'अपराध' केवल इतना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में लद्दाख को वहां की आदिवासी जनसंख्या के आधार पर छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की थी। सरकार ने लंबे समय तक केवल आश्वासन दिए, लेकिन मांग पूरी नहीं की। इसके बाद सोनम वांगचुक को शांतिपूर्ण तरीके से लद्दाख से दिल्ली की यात्रा शुरू करनी पड़ी, लेकिन बीच रास्ते में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। तारा राम मेहना ने बताया कि इस पदयात्रा को संवैधानिक अधिकार जागरूकता पदयात्रा इसलिए नाम दिया गया है क्योंकि आम जनता अपने अधिकारों से अनजान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग अपने हक और अधिकारों की आवाज उठाते हैं, उन्हें दमनकारी नीतियों के तहत जेल में डाल दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक ही नहीं, इससे पहले कई लेखक और पत्रकार भी इसी तरह जेलों में बंद हैं।
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'पूरे देश में निकालेंगे पदयात्रा'
उन्होंने कहा कि सरकार का यह मानना था कि सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल में रखने से राजस्थान में उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं होगा, लेकिन यह सरकार की भूल साबित हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क हैं और वे स्वयं लद्दाख जाकर सोनम वांगचुक से मिल चुके हैं। मेहना ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, तो यह पदयात्रा पूरे देश में निकाली जाएगी और लेह-लद्दाख तक भी पहुंचेगी।