बहरोड़ रीको औद्योगिक क्षेत्र में अमर शहीद रामकुमार की 41वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित पारंपरिक कुश्ती दंगल ने शौर्य, परंपरा और रोमांच का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। शहीद की स्मृति में आयोजित इस दंगल को देखने के लिए सुबह से ही अखाड़े के चारों ओर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीण अंचल के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने पहलवानों का उत्साहवर्धन किया और अमर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मिट्टी के अखाड़े में जैसे ही कुश्ती मुकाबलों की शुरुआत हुई, पूरा माहौल जोश और उत्साह से भर उठा। पहलवानों ने एक-दूसरे पर दमदार दांव-पेच आजमाए। कहीं ताकत का जोर देखने को मिला तो कहीं फुर्ती और रणनीति ने दर्शकों को हैरान कर दिया। हर मुकाबले के साथ तालियों और जयकारों की गूंज और तेज होती गई। स्थानीय पहलवानों के साथ-साथ बाहर से आए नामी पहलवानों ने भी अखाड़े में अपने कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
आयोजन समिति ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कुश्ती दंगल हर वर्ष शहीद रामकुमार की पुण्यतिथि पर आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य शहीद के बलिदान को स्मरण करने के साथ-साथ पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना है। दंगल के दौरान विजेता और उपविजेता पहलवानों को नकद पुरस्कार और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने शहीद रामकुमार के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, खेल भावना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।
कुश्ती दंगल में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। आयोजकों ने भविष्य में इस आयोजन को और बड़े स्तर पर आयोजित करने की घोषणा भी की। शहीद की स्मृति में आयोजित यह कुश्ती दंगल केवल एक खेल आयोजन नहीं रहा, बल्कि शौर्य, सम्मान और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ गया।