राजस्थान के नागौर जिले में पुलिस लाइन क्षेत्र, जो सुरक्षा बलों का गढ़ माना जाता है, वहां चोरों ने इतनी हिम्मत दिखाई कि एक साथ 6 पुलिसकर्मियों के सरकारी क्वार्टरों में सेंध लगाकर लाखों की चोरी कर ली। यह घटना न केवल पुलिस विभाग के लिए झटका है, बल्कि आमजन में भी सुरक्षा को लेकर गहरा भय पैदा कर रही है। चोरों ने ताले लगे बंद क्वार्टरों को निशाना बनाया और अंदर घुसकर अलमारियों, संदूकों तथा अन्य स्थानों को अच्छी तरह खंगाल डाला।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, चोरों ने कुल 5 से 7 लाख रुपये मूल्य की सोने-चांदी की ज्वेलरी और 3 से 4 लाख रुपये नकद कैश चुरा लिया। प्रभावित पुलिसकर्मियों में कॉन्स्टेबल शारदा बिश्नोई,पुनाराम टांडी,शारदा चौधरी,मनीराम,विक्रम और सियाराम के नाम शामिल हैं। ये सभी पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे, जब चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। ड्यूटी से लौटते ही पुलिसकर्मियों को घरों के ताले टूटे हुए मिले, जिसके बाद उन्होंने तुरंत थाने में सूचना दी।
घटना की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) मृदुल कच्छावा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसपी ने मौके का निरीक्षण किया और जांच को तेज करने के सख्त निर्देश दिए। फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। साथ ही, पुलिस लाइन और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि चोरों की पहचान और उनके मूवमेंट का पता लगाया जा सके। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और शीघ्र खुलासे का दावा किया है।
यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि पुलिस लाइन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चोरों ने चुनौती दी है। जहां आमतौर पर पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी के दौरान परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं यहां उनके अपने घरों को निशाना बनाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वारदात पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
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कुछ स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया पर चर्चा में यह भी उठाया जा रहा है कि जिले में पिछले 3 महीनों में हुई एक अन्य चोरी की घटना का अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि एसपी मृदुल कच्छावा का ध्यान मुख्य रूप से ऑपरेशन नीलकंठ (नशा तस्करी के खिलाफ) और ऑपरेशन त्रिनेत्र (अन्य विशेष अभियानों) पर ज्यादा है, जबकि सामान्य चोरियों और छोटी-मोटी वारदातों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस घटना के बाद जिले में भय का माहौल है।
लोग कह रहे हैं कि पुलिस का घर भी असुरक्षित है, तो आम आदमी का क्या होगा? पुलिस का प्रसिद्ध स्लोगन अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास अब उल्टा साबित हो रहा है, ऐसा कई लोगों का मानना है।
पुलिस विभाग का कहना है कि जांच पूरी गंभीरता से चल रही है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। एसपी कच्छावा ने कहा है कि किसी भी साक्ष्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और चोरों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, इस घटना ने पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। क्या पुलिस लाइन में अतिरिक्त गश्त, बेहतर लाइटिंग और सीसीटीवी कवरेज की जरूरत है? यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है।