टोंक जिले के बहुचर्चित समरावता थप्पड़ कांड और उपद्रव मामले में आज एससी-एसटी कोर्ट में नरेश मीना से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई हुई। नरेश मीना के अधिवक्ता सलीम सूरी ने बताया कि एफआईआर नंबर 166 में जमानत निरस्तीकरण (बेल कैंसलेशन) याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख 21 फरवरी 2026 तय की है।
वहीं एफआईआर नंबर 167 के तहत एससी-एसटी कोर्ट ने आज नरेश मीना सहित दो अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (चार्ज फ्रेम) कर दिए हैं। कोर्ट में अनुपस्थित रहे एक आरोपी के खिलाफ चार्ज फ्रेम की अगली तारीख 7 फरवरी तय की गई है। इस मामले में कुल 60 आरोपियों पर चार्ज फ्रेम होना था, जिनमें से 56 पर पहले ही आरोप तय हो चुके थे। नरेश मीना और तीन अन्य आरोपियों पर चार्ज फ्रेम होना शेष था, जिसे आज पूरा कर दिया गया।
कोर्ट की कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नरेश मीना ने कहा कि हाल ही में उनियारा के सोप गांव में हुए आंदोलन के बाद अब समरावता के पीड़ित लोगों को मुआवजा मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन समझौते पर अमल करने लगे हैं। समरावता गांव की जर्जर सरकारी स्कूल भवन की मरम्मत शुरू होने पर भी उन्होंने खुशी जताई।
अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन की वायरल चिट्ठी पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को नोटिस जारी किए जाने के मामले में नरेश मीना ने पलटवार करते हुए कहा कि मोरपाल सुमन द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को बड़े नेताओं को नोटिस जारी करना चाहिए था, लेकिन दबाव में आकर मोरपाल सुमन को नोटिस जारी किया गया, जो गलत है।
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सवाई माधोपुर के बौंली में महिला की मौत के मामले पर नरेश मीना ने कहा कि वे वहां जाना चाहते थे, लेकिन सर्वाइकल पेन के चलते डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही टोंक में बजरी माफियाओं के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा। बेल कैंसलेशन के मामले पर नरेश मीना ने कहा कि सरकार से समझौता हुआ था कि सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अमल होगा।
आपको बता दें कि देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में मतदान बहिष्कार के समय नरेश मीना ने एरिया मजिस्ट्रेट अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद देर रात मतदान समाप्त होने पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई, जिसमें पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं। कई ग्रामीण घायल हुए और कई वाहन जला दिए गए।
इस पूरे मामले में नरेश मीना की गिरफ्तारी हुई थी और दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। इसके बाद झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत के मामले में धरना-प्रदर्शन और अस्पताल में हंगामे के आरोप में भी नरेश मीना को गिरफ्तार किया गया था, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बावजूद नगरफोर्ट पुलिस ने विशेष एपीपी के जरिए टोंक एससी-एसटी कोर्ट में जमानत निरस्तीकरण की अर्जी दाखिल की थी।