Hindi News
›
Video
›
Uttarakhand
›
Chamoli News
›
Pokhri: Amidst a scarcity of resources, mountain farming survives; paddy transplantation is being carried out through collective labor
{"_id":"6a1d814c38fa8df32d09f575","slug":"video-pokhri-amidst-a-scarcity-of-resources-mountain-farming-survives-paddy-transplantation-is-being-carried-out-through-collective-labor-2026-06-01","type":"video","status":"publish","title_hn":"Pokhri: संसाधनों की कमी के बीच जीवित है पहाड़ की खेती, सामूहिक श्रम से हो रही धान की रोपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pokhri: संसाधनों की कमी के बीच जीवित है पहाड़ की खेती, सामूहिक श्रम से हो रही धान की रोपाई
पोखरी। आधुनिक कृषि उपकरणों, सिंचाई सुविधाओं और सरकारी संसाधनों के अभाव में पहाड़ के काश्तकार आज भी परंपरागत तरीकों से खेती करने को मजबूर हैं। कठिन मेहनत के बावजूद खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण युवाओं का रुझान भी कृषि से लगातार कम होता जा रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखते हुए धान की रोपाई में जुटे हुए हैं।
विकासखंड के विरसण सेरा ग्राम पंचायत के चेमड़ा गांव में इन दिनों धान रोपाई का कार्य चरम पर है। गांव के पास बहने वाले छोटे से गदेरे के सीमित जलस्रोत पर ही पूरी खेती निर्भर है। पानी की कमी के कारण ग्रामीण बारी-बारी से रातभर अपने खेतों में पानी छोड़ते हैं। खेतों में पर्याप्त पानी भरने के बाद बैलों से हल चलाकर उन्हें रोपाई के लिए तैयार किया जाता है। ग्रामीण काश्तकार सत्येंद्र सिंह नेगी और विक्रम सिंह नेगी बताते हैं कि धान की खेती की शुरुआत ‘बिजवाण’ तैयार करने से होती है। पहले चयनित खेतों में धान का बीज बोया जाता है। पौधे तैयार होने पर महिलाएं उन्हें सावधानीपूर्वक उखाड़कर रोपाई के लिए तैयार करती हैं। इसके बाद गांव की महिलाएं घंटों तक पानी से लबालब खेतों में खड़े होकर धान की रोपाई करती हैं। चेमड़ा गांव में आज भी सामूहिक श्रम और आपसी सहयोग की पुरानी परंपरा कायम है। ग्रामीण एक-दूसरे के खेतों में मिलकर हल लगाते हैं और रोपाई का कार्य पूरा करते हैं। यही सामूहिकता खेती को जीवित रखने का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सिंचाई नहरों का निर्माण हो, आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएं और किसानों को समय पर तकनीकी सहायता मिले तो पहाड़ की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।