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Nag Panchami : दांत तोड़कर कैद किए सांप, जबरन पिलाया जा रहा दूध; नागपंचमी पर करतब के पहले क्रूरता

Tue, 21 Jul 2026 01:26 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Tue, 21 Jul 2026 01:26 PM IST
सार

Bihar News : बिहार में नागपंचमी पर जगह-जगह मेले लगते हैं। मेलों में विषधर सांपों के साथ करतब लोग देखते हैं। लेकिन, ऐसे करतब से पहले विषधर के साथ क्रूरता होती है। कैसी क्रूरता और कहां हो रहा, जानिए इस खबर में।

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Nag Panchami Cruelty Snakes Face Defanging and Force-Feeding for Festival Performances
नागपंचमी से पहले सांपों के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नागपंचमी का पर्व नजदीक आते ही समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड में एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया और देसरी सहित कई इलाकों में धार्मिक आयोजन और सांपों के प्रदर्शन के लिए उनकी अवैध तरीके से पकड़ शुरू हो चुकी है।
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पर्यावरण प्रेमियों का दावा है कि खेतों और जंगलों से कोबरा, करैत, धामन तथा अन्य प्रजातियों के सांपों को उनके प्राकृतिक आवास से पकड़कर कैद किया जा रहा है। इन सांपों को कई दिनों तक कथित तौर पर मिट्टी के घड़ों, लवनी, टीन व प्लास्टिक के डिब्बों तथा बोरों में बंद रखा जाता है, जहां उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी भी नहीं मिलता, ताकि नागपंचमी के दिन मेलों और आयोजनों में उनका प्रदर्शन किया जा सके।
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'करतब' के नाम पर क्रूरता के आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े डॉ. अंजनी कुमार द्विवेदी ने बताया कि नागपंचमी के अवसर पर बूढ़ी गंडक नदी के किनारे होने वाले आयोजनों में सांपों के साथ ऐसे करतब दिखाए जाते हैं, जो भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता संबंधी प्रावधानों के विरुद्ध हैं। उनका दावा है कि कुछ मामलों में सांपों के जहरीले दांत तोड़ दिए जाते हैं, विष ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाया जाता है और उन्हें लंबे समय तक कैद में रखा जाता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सांप दूध नहीं पचा सकते, इसलिए उन्हें दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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विभूतिपुर के इन इलाकों में नागपंचमी पर होता है सांपों का प्रदर्शन
नागपंचमी पर्व के अवसर पर विभूतिपुर के सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया और देसरी सहित कई इलाकों में धार्मिक मेलों का आयोजन तथा सांपों का प्रदर्शन होता रहा है। इसके लिए उनकी अवैध तरीके से पकड़ शुरू हो चुकी है।

कोबरा-करैत सहित जहरीले सांपों का होता है प्रदर्शन
नागपंचमी पर्व के मौके पर नदियों के तट पर आयोजित होने वाले मेलों के मद्देनजर खेतों और जंगलों से कोबरा, करैत, धामन तथा अन्य प्रजातियों के सांपों को नागपंचमी से कई सप्ताह पहले कथित 'भगत' पकड़ लेते हैं। इसके बाद उन्हें मिट्टी के घड़ों, टीन के डिब्बों या बंद बोरों में रखा जाता है, जहां उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी भी नहीं मिलता।

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कानून क्या कहता है?
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अधिकांश सांप संरक्षित वन्यजीव हैं। उन्हें पकड़ना, कैद करना, खरीदना-बेचना या सार्वजनिक प्रदर्शन में इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है।

पिछले साल दर्ज हुई थी प्राथमिकी
विभूतिपुर थाना क्षेत्र में पिछले वर्ष भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39(3) और 51 के तहत पांच नामजद समेत कई लोगों के खिलाफ गैर-जमानती प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि इस वर्ष भी संवेदनशील क्षेत्रों में कथित तौर पर तैयारियां जारी हैं और रोकथाम के लिए अपेक्षित कार्रवाई के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

प्रशासनिक सक्रियता पर सवाल
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्ष कार्रवाई होने के बावजूद इस बार पर्व से पहले संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान, लगातार निगरानी या छापेमारी जैसी गतिविधियां पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रही हैं। उनका सवाल है कि यदि पहले से संभावित उल्लंघन की आशंका है, तो समय रहते रोकथाम के लिए और प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।

वन विभाग का पक्ष
इस संबंध में समस्तीपुर के डीएफओ नरिंदर पाल सिंह ने बताया कि वन विभाग वन्यजीव संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेगा।


आस्था और संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत
नागपंचमी भारतीय परंपरा और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रद्धा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण कानूनों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। यदि कहीं संरक्षित वन्यजीवों को अवैध रूप से पकड़ने या उनके साथ क्रूरता किए जाने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती होगी। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और वन विभाग पर्व से पहले निगरानी और कार्रवाई को किस स्तर तक प्रभावी बनाते हैं।

गंभीर सवाल खड़े हुए
हर साल नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है, लेकिन यदि पूजा के नाम पर संरक्षित वन्यजीवों को पकड़कर कैद किया जाता है और उनके साथ क्रूरता होती है, तो यह आस्था और कानून - दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस बार वन विभाग और जिला प्रशासन समय रहते कार्रवाई कर पाते हैं या नहीं।
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