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Bihar: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल पर बवाल! मंच पर नहीं मिली कुर्सी तो भड़के नेता; जानें क्या कहा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:41 PM IST
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सार
Gayaji: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यक्रम में गया जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी और उपाध्यक्ष शीतल यादव को मुख्य मंच पर स्थान नहीं मिलने से विवाद खड़ा हो गया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रोटोकॉल की अनदेखी और जनता के जनादेश का अपमान बताते हुए जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं तथा मामले को उच्च स्तर तक ले जाने की बात कही है।
कार्यकर्ताओं के बीच बैठी गया जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गया के खिजरसराय में आयोजित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गया जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मुख्य मंच पर स्थान नहीं मिलने से नाराजगी खुलकर सामने आई है। दोनों जनप्रतिनिधियों ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के जनादेश का अपमान बताते हुए जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मंच से दूर रखे जाने पर जताई कड़ी आपत्ति
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम लोग मौजूद थे। लेकिन कार्यक्रम के दौरान गया जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी और उपाध्यक्ष शीतल यादव को मुख्य मंच पर जगह नहीं दी गई। इसे लेकर दोनों ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यह स्थापित प्रोटोकॉल की अनदेखी है। जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने कहा कि गया जिला परिषद जिले के 10 विधानसभा क्षेत्रों और तीन लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री स्तर के कार्यक्रमों में जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को मंच पर स्थान मिलना सामान्य प्रशासनिक परंपरा और प्रोटोकॉल का हिस्सा माना जाता है। इसके बावजूद उन्हें मंच से दूर रखा गया।
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प्रशासन पर लगाए प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप
उपाध्यक्ष शीतल यादव ने जिला प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अधिकारियों ने प्रोटोकॉल की खुलेआम अवहेलना की है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। यदि संबंधित अधिकारियों को प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं है, तो यह प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक है और यदि जानकारी होने के बावजूद ऐसा किया गया है, तो यह और भी चिंताजनक है।
‘यह सिर्फ हमारा नहीं, जनता के सम्मान का सवाल’
दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है, बल्कि उन लाखों मतदाताओं के सम्मान से जुड़ा है, जिन्होंने उन्हें चुनकर जिम्मेदारी सौंपी है। उनका कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनदेखी सीधे तौर पर जनता की आवाज को नजरअंदाज करने के समान है।
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उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी, जवाबदेही की मांग
जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को उच्च स्तर तक ले जाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सामने आए इस विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन या सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।